लालघाटी 74 बीघा जमीन को सरकारी मानते हुए नोटिस जारी

भूमि सर्वे क्रमांक 102 में 9 लोगों को कलेक्टर ने नोटिस जारी किया, 3 को सभी को न्यायालय में देना होगा जवाब

 

शाजापुर, 1 फरवरी. शाजापुर में सरकारी जमीनों को बेचने का गौरखधंधा दो दशक से जारी है. भूमाफियाओं ने शहर के आसपास की सरकारी जमीनों पर लोगों को भूखंड देकर बसा दिया है. पिछले दिनों राम मंदिर की जमीन पर भी लोगों को भूखंड बेचने के मामले में प्रशासन ने नोटिस जारी किए थे और एफआईआर की तैयारी की जा रही है. अब एक बार फिर लालघाटी के भूमि सर्वे क्रमांक 102 लगभग 74 बीघा जमीन को सरकारी मानते हुए 9 भूस्वामियों को नोटिस जारी किए है. 3 फरवरी तक कलेक्टर न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं.

गौरतलब है कि शाजापुर पटवारी हल्का मगरिया के भूमि सर्वे क्रमांक 102 रकबा 74 बीघा 14 बीसवां राजस्व रिकॉर्ड में 1925-26 में शासकीय होकर पहाड़ के रूप में दर्ज है. उक्त भूमि पर कोई भी कृषक, काश्तकार दर्ज नहीं था. पहाड़ की भूमि होने से यहां खेती नहीं होती थी. 1959 में पक्का कृषक का स्वामित्व किसी को नहीं मिला, लेकिन भूमाफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर इसे निजी नामों में दर्ज किया गया. भूमाफियाओं ने इस सरकारी जमीन पर लोगों को भूखंड बेचकर उन्हें बसा दिया. शिकायत के आधार पर शाजापुर एसडीएम ने जांच करवाई और उक्त जमीन को शासकीय दर्ज किए जाने हेतु जांच प्रतिवेदन शाजापुर कलेक्टर को सौंपा. जांच प्रतिवेदन के आधार पर 74 बीघा जमीन सरकारी घोषित की कार्यवाही की जा रही है.

नोटिस तक सीमित होगा या सख्त कार्यवाही होगी?

बीते दो दशकों में भूमाफियाओं के खिलाफ जांच और नोटिस तक का ही खेल देखने को मिलता रहा है. राम मंदिर की जमीन के खिलाफ भी भूमाफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब देखना यह है कि 74 बीघा भूमि सर्वे क्रमांक 102 की भूमि को सरकारी होने पर नोटिस तो जारी किए गए, अब इन भूमाफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या फिर नोटिस-नोटिस का यह खेल हमेशा की तरह चलता रहेगा.

 

भूमाफियाओं ने सरकारी जमीन पर बसा दी कॉलोनी

 

लालघाटी के सर्वे क्रमांक 102 की भूमि, जो 74 बीघा से अधिक है, वहां भूमाफियाओं ने सरकारी जमीन पर भूखंड बेचकर लोगों को बसा दिया. सबसे बड़े भूमाफिया के रूप में किसी गोठी का नाम सामने आ रहा है. इस जमीन पर प्रायवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर कॉलोनी विकसित की जा रही है. जहां लोगों को भूखंड बेचे गए हैं. अब सवाल यह उठता है कि यदि ये जमीन सरकारी घोषित होती है, तो जिन लोगों को भूखंड बेचे गए, उनका क्या होगा. पहले भी राम मंदिर की जमीन को भी शहर के कुछ तथाकथित भूमाफियाओं ने लोगों को बेचकर वहां मकान बनवा दिए. यह मामला अभी भी लंबित है, लेकिन राम मंदिर के भूमाफियाओं के खिलाफ भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है. अब देखना यह है कि इस मामले में क्या कार्यवाही होती है?

 

इन भूस्वामियों को मिला नोटिस…

 

राजमल पिता रामचंद्र एवं हिम्मत पिता मगनीराम निवासी मूलीखेड़ा, कान्हा रियल मार्ट प्रा. लि., मनोज गोठी, हिम्मत गोठी लालघाटी, लक्ष्मीनारायण पिता गणपत सिंह मूलीखेड़ा, सुमित्रा देवी पति गौरीशंकर चौरसिया शाजापुर, गौरीशंकर पिता गोवर्धन लाल चौरसिया शाजापुर, साधना शुक्ला भंसाली मोहल्ला, आशा पति रामप्रसाद मारवाड़ सेरी, प्रहलाद पिता भंवरलाल, देवेंद्र वर्मा, शैलेंद्र वर्मा पिता प्रहलाद वर्मा शरद नगर. इन लोगों से जवाब 3 फरवरी को कलेक्टर न्यायालय में उपस्थित होकर मांगा गया है.

 

इनका कहना है

शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर जांच प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों को कार्यवाही के लिए भेजा गया है. आगामी कार्यवाही वरिष्ठ अधिकारी करेंगे.

– सुश्री मनीषा वास्कले, एसडीएम, शाजापुर

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