4000 खाते किए ब्लॉक, 15 करोड़ लौटाए
इंदौर: क्राईम ब्रांच ने साइबर ठगी के मामलों में बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक साल में चार हजार से अधिक बैंक खाते ब्लॉक करवाए हैं, इन खातों का उपयोग डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन सट्टा, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड और अन्य साइबर अपराधों में किया जा रहा था. साइबर अपराधी अब पहले की तरह सिर्फ पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब वे हर राज्य में किराए के बैंक खाते इस्तेमाल कर रहे हैं. इंदौर और आसपास के इलाकों में भी ठगों ने बड़ी संख्या में खाताधारकों को अपने जाल में फंसा रखा था.
एडीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने बताया कि पुलिस ने इन खातों को ब्लॉक करवाने के साथ ही ठगी के शिकार लोगों के करीब 15 करोड़ रुपए वापस दिलवाए हैं, जो अब तक का एक रिकॉर्ड है. पुलिस की इस कार्रवाई से ठगों का नेटवर्क कमजोर हुआ है और भविष्य में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. इंदौर और आसपास के गांवों में कई लोग साइबर ठगों के लिए किराए पर खाते मुहैया करा रहे थे, जिन्हें पुलिस ने चिन्हित कर कार्रवाई की है. इतना ही नहीं, गुजरात और उज्जैन पुलिस भी इंदौर में खाताधारकों की धरपकड़ के लिए लगातार आ रही है और कई मामलों में अपराधियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है. क्राइम ब्रांच की अपील है कि कोई भी व्यक्ति अपने बैंक खाते को किराए पर देने या किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे के लेन-देन से बचें. यदि कोई संदिग्ध लेन-देन हो, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें.
