नयी दिल्ली, (वार्ता) सोने के वैश्विक बाजार की निगह रखने वाले संगठन वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) ने आगामी बजट में सोने पर आयात शुल्क में किसी प्रकार की बढ़ोतरी न करने की सिफारिश की है और आगाह किया है कि शुल्क बढ़ने का उद्योग तथा अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
डब्ल्यूजीसी के क्षेत्रीय मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ ) सचिन जैन ने सोने पर शुल्क में पिछले कमी सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करने वाला फैसला बताते हुए सोमवार को कहा, “आगामी बजट में आयात शुल्क में किसी भी वृद्धि का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे तस्करी में वृद्धि, घरेलू सोने की कीमतों में वृद्धि और उद्योग को पीछे धकेलना पड़ सकता है।”
उन्होंने एक बयान में कहा, “स्वर्ण उद्योग भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 1.3 प्रतिशत का योगदान देता है और लगभग 20-30 लाख लोगों को रोजगार देता है। पिछले जुलाई में सोने पर आयात शुल्क कम करने के सरकार के फैसले का स्वर्ण उद्योग पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसने अनौपचारिक रास्तों से सोने का आयात कम हुआ है, स्वर्ण आयात के आधिकारिक चैनलों में मजबूती आई है और सोने की घरेलू खरीद को प्रोत्साहित किया है।”
बयान में कहा गया है कि सोने पर करों में कमी से एक अधिक संगठित और पारदर्शी उद्योग का निर्माण हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप एक मजबूत स्वर्ण बाजार बना है।
श्री जैन ने कहा, “यह जरूरी है कि सरकारी निकायों, उद्योग के खिलाड़ियों और वित्तीय संस्थानों सहित हितधारक इस सकारात्मक गति को बनाए रखने के लिए सहयोग करें। एक तालमेलपूर्ण वातावरण को बढ़ावा देकर, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि स्वर्ण उद्योग लगातार आगे बढ़ता रहे, नवाचार करता रहे और भारत के आर्थिक विकास और समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे। पिछले दशक की तरह, हम प्रगतिशील, लोगों के अनुकूल और उद्योग सहायक नीति घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं।”
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई, 2024 को पूर्ण बजट में सोने और चांदी की बट्टियों पर आयात शुल्क 15 प्रतिशत से घटा कर छह प्रतिशत कर दिया था।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में दिसंबर 2024 में 4.7 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात किया गया था। भारत सालाना लगभग 800 टन सोने का आयात करता है। बहुत सा सोना आभूषण बना कर पुनर्नियात के काम आता है।
