दीक्षा दिवस महोत्सव में प्रवाहित हुई आस्था एवं श्रद्धा की भागीरथी

*गुरुदेव का किया पूजन, संगीतमय भक्ति गीतों पर झूमे श्रद्धालु, आर्यिकाओं ने दीक्षा दिवस की अलौकिक घटनाओं को किया स्मरण*

 

ग्वालियर। विद्याधाम, साक्षी परिसर में भव्य रूप में आयोजित आर्यिका संघ की आर्यिकाओं के दीक्षा दिवस समारोह में भक्ति, आस्था एवं श्रद्धा की भागीरथी प्रवाहित हो उठी। आर्यिकाओं ने अपने गुरुदेव का पूजन किया। संगीतमय भक्ति गीतों पर श्रद्धालु महिला पुरुषों ने श्रद्धाभाव में मगन होकर खूब नृत्य किए। गुरुदेव एवं आर्यिका संघ के जयघोष से विद्याधाम परिसर गुंजायमान हो उठा। आर्यिकारत्न मां श्री पूर्णमति ने आर्यिका दीक्षा के महत्व एवं इसके बाद जीवन में आने वाले सुखद आध्यात्मिक परिवर्तनों पर विभिन्न उदाहरणों के साथ प्रकाश डाला। इससे पूर्व षोडस कारण विधान की पूजा की गई।

ग्वालियर जैन समाज के मीडिया प्रभारी ललित जैन ने बताया कि विद्याधाम में आर्यिका विशदमति, आर्यिका विपुलमति, आर्यिका मधुरमति, आर्यिका कैवल्यमति का दीक्षा दिवस समारोह धार्मिक, आध्यात्मिक एवं मंत्रमुग्ध कर देने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम प्रात: 8 बजे से प्रारंभ हुआ और दोपहर बाद तक चला। इस अवसर पर इन सभी विदुषी आर्यिकाओं ने दीक्षा दिवस के दिन की अलौकिक घटनाओं को स्मरण करते हुए बताया कि उन्हें आचार्य विद्यासागर महाराज ने 25 फरवरी 1993 को नंदीश्वरद्वीप पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान अतिशय क्षेत्र पिसनहारी मढ़ियाजी, जबलपुर में दीक्षा प्रदान की थी। आर्यिकाओं ने कहा कि गुरुवर आचार्य विद्यासागर जी का मंगल सानिध्य पाकर पाषाण भी पारस बन जाता था। गुरुदेव समाधिस्थ होने के बाद आज भी उन पर आशीषों की बरसात कर रहे हैं।जैन धर्म में दीक्षा एक महत्वपूर्ण संस्कार हैं, जो व्यक्ति को धार्मिक, नैतिक और व्यक्तिगत रूप से विकसित करने में मदद करता है.

*दीक्षा महोत्सव के माध्यम से अगले पायदान पर चढ़ जाते हैं : मां पूर्णमति*

इस अवसर पर आर्यिका मां श्री पूर्णमति जी ने आसंदी से अपने धर्मसंदेश में कहा कि आत्म व विश्व कल्याण की भावना ही जैन संतों की धरोहर होती है। अहिंसा धर्म का पालन करते हुए हर प्राणी को कल्याण की भावना रखनी चाहिए। दीक्षा दिवस समारोह में सर्वप्रथम जिन भगवान का पूजा विधान किया गया, नित्य नियम की पूजा के बाद भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद शास्त्रों की पूजा हुई और आर्यिकाओं का आगमन हुआ। मां पूर्णमति ने कहा कि दीक्षा दिवस महोत्सव संतों को एक नई प्रेरणा देने का काम करता है। जैन संत परोपकार की भावना को लेकर दीक्षा महोत्सव के माध्यम से अगले पायदान पर चढ़ जाते हैं। संतों की वाणी परोपकार के लिए ही होती है और भावना में विश्व कल्याण छिपा होता है।

*इनकी रही उपस्थिति*

इस अवसर पर पंचकल्याणक महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष पदमचंद जैन, महामंत्री राजकुमार जैन सर, कोषाध्यक्ष मनीष जैन साक्षी, वर्षायोग समिति के संयोजक विजय जैन, कोषाध्यक्ष कुशल जैन सहित सैकड़ों की संख्या में धर्मप्रेमी बंधुओं की उपस्थिति रही।

*पंचकल्याणक महोत्सव के लिए आज होगा पात्र चयन*

विद्याधाम, ग्वालियर में आयोजित हो रहे भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ के लिए पात्र चयन रविवार, 26 जनवरी को प्रात: 08 बजे से होगा। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में इस अवसर पर आर्यिका मां पूर्णमति जी राष्ट्र निर्माण के लिए विशेष प्रवचनात्मक संदेश भी देंगी।

*षोडस कारण विधान में अभिषेक व शाँतिधारा के साथ किया पूजन*

मीडिया प्रभारी ललित जैन ने बताया कि षोडस कारण विधान में आज शनिवार को सर्वप्रथम अभिषेक व शाँतिधारा हुई। श्रद्धालुओं ने शांतिधारा कर पूज्य मातुश्री पूर्णमति से आशीर्वाद प्राप्त किया। तदुपरान्त आज के पुण्यार्जक सुभाषचंद कमलकुमार धनेली वालों द्वारा विधान संपन्न किया गया। ब्रह्मचारी दीपक भैया डेहरका वालों, ब्र. आशीष भैया एवं मुरार के शुभम शास्त्री ने मां पूर्णमति के ससंघ सानिध्य में विधान कराया। प्रभु को अर्घ्य समर्पित किए गए।

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Sat Jan 25 , 2025
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