इंदौर: क्राइम ब्रांच ने ऑनलाइन ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग फर्जी डिजिटल अरेस्ट के जरिए लोगों को डराकर करोड़ों रुपये की ठगी करता था। गिरफ्तार आरोपियों में दो सूरत (गुजरात) और दो मैहर (मध्यप्रदेश) के रहने वाले हैं।
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और कॉल के जरिए स्वयं को पुलिस, सीबीआई और आरबीआई अधिकारी बताकर ठगी की। उन्होंने पीड़ितों को यह कहकर डराया कि उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज है। इसके बाद विभिन्न बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते थे।
इंदौर की एक 59 वर्षीय महिला से इन जालसाजों ने लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये की ठगी की। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने व्हाट्सएप और स्काइप कॉल के माध्यम से फर्जी दस्तावेज दिखाकर महिला को धमकाया और कहा कि सहयोग न करने पर उन्हें जेल जाना होगा।
तफ्तीश में जुटी पुलिस
पीड़िता की शिकायत पर इंदौर क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने गुजरात के सूरत से प्रतीक जरीवाला (24) और अभिषेक जरीवाला (25) को गिरफ्तार किया, वहीं मध्यप्रदेश के मैहर से चंद्रभान बंसल (57) और राकेश बंसल (32) को पकड़ा गया।
आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे कमीशन पर बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग ठगी में किया जाता था। आरोपियों के खातों में करोड़ों रुपये के लेनदेन का पता चला है, जिन्हें फ्रीज कर दिया गया है।
पुलिस रिमांड पर पूछताछ जारी
क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है। गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के अन्य मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह संगठित रूप से काम करता था और देशभर में कई लोगों को ठग चुका है।