जबलपुर: बदलते समय के साथ शहर का लगातार विस्तार हो रहा है। नगर निगम की सीमाएँ अब एक ओर तेवर तक तो दूसरी ओर सुहागी तक पहुँच गई हैं। बढ़ती आबादी के साथ कछपुरा मालगोदाम अब शहर के बीचों-बीच आ गया है। इसके आसपास दो दर्जन से अधिक कालोनियां बस गई हैं। इन कालोनियों में रहने वाले अब कछपुरा मालगोदाम के कारण होने वाली दिक्कतों का खामियाजा भुगत रहे हैं। यहाँ रात भर वाहनों की आवाजाही और उससे उड़ती डस्ट से लोगों की परेशानी बढ़ रही है।
प्रयास हैं जारी
रेल मंडल जबलपुर के अधिकारियों की माने तो गढ़ा स्टेशन को जबलपुर डिविजन में शामिल करने के प्रयास किया जा रहे हैं। जिससे मालगोदाम को वहां शिफ्ट किया जा सके। एवं कछपुरा में कोचिंग डिपो बनाने का विचार भी किया जा रहा है। जिस वक्त कछपुरा मालगोदाम का निर्माण किया गया, उस वक्त यह इलाका शहर के बाहर आता था, अब ऐसी स्थिति नहीं है।
सांस लेना भी मुश्किल
कछपुरा मालगोदाम के आसपास हर तरफ कीचड़, धूल और गंदगी नजर आने लगी है। बारिश में दुर्गंध से लोगों का बुरा हाल हो जाता है, तो धूप निकलने पर यहाँ उड़ती धूल लोगों का जीना दूभर कर रही है। इस मालगोदाम के आसपास रहने वालों का कहना है कि समय के साथ अब इस मालगोदाम को शहर से दूर शिफ्ट कर देना चाहिए। जब इसे यहां शिफ्ट किया गया था तब आबादी नहीं थी, जानकारों का कहना है कि सबसे पहले मालगोदाम जबलपुर मुख्य स्टेशन के समीप प्लेटफॉर्म नंबर-6 की ओर संचालित था। यहाँ वाहनों की आवाजाही बढ़ने और लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए वर्षों पहले इस मालगोदाम को स्टेशन से दूर कर कछपुरा में शिफ्ट कर दिया गया था।
बढ़ती चली गई बसाहट
जानकारो की माने तो जिस वक्त यहाँ मालगोदाम शिफ्ट किया गया था उस वक्त यहाँ न तो कालोनियाँ थीं और न ही आबादी क्षेत्र था। आसपास खेत और मैदान ही नजर आते थे, मगर धीरे-धीरे यहाँ कॉलोनियाँ बनने लगीं और यह बड़ी आबादी वाला क्षेत्र बन गया। यही नहीं कछपुरा मालगोदाम तक आने जाने वाले भारी वाहनों के कारण आए दिन हादसे भी होते हैं। इसे लेकर मालगोदाम शहर के बाहर करने के स्वर बुलंद हो गए हैं ।
इनका कहना है
कछपुरा माल गोदाम के आसपास स्प्रिंकलर लगाए जा रहे हैं एवं धूल काम करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। गढ़ा स्टेशन जबलपुर डिविजन में आ जाए, फिर इसे शिफ्ट कर दिया जाएगा।
डॉ. मधुर वर्मा, सीनियर डीसीएम, पमरे