पश्चिम बर्धमान में रेशम उत्पादन को पुनर्जीवित करने के लिए ‘सॉयल-टू-सिल्क’ पहल को बढ़ावा देने को सरकार प्रतिबद्ध: गिरिराज

आसनसोल, 7 नवंबर (वार्ता) पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तीकरण को एक साथ जोड़ने के उद्देश्य से केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले में खनन से प्रभावित भू-क्षेत्र में रेशम कीट पालन को प्रोत्साहित करने के लिए अभिनव ‘सॉयल-टू-सिल्क’ (मिट्टी से रेशम तक) पहल लागू करने पर बल दिया है।

श्री सिंह ने शनिवार को यूनीवार्ता से खास बातचीत कहा कि सॉयल टू सिल्क परियोजना का उद्देश्य कम उपयोग में लाई जा रही और पारिस्थितिक रूप से क्षतिग्रस्त खनन भूमि को शहतूत के बागानों में परिवर्तित करना है। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित हरित होगा, भू-क्षत्र कृषि की दृष्टि से अधिक उपजाऊ बनेगा और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के टिकाऊ अवसर पैदा होंगे।

पश्चिम बर्धमान स्थित रानीगंज कोयला क्षेत्र देश का सबसे पुराना कोयला क्षेत्र है, जिसका इतिहास 250 वर्षों से भी अधिक पुराना है। पर्यावरणीय पुनरुद्धार और औद्योगिक विकास के इस एकीकरण से संसाधनों से समृद्ध, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील जिलों के लिए एक आदर्श मॉडल विकसित होने की उम्मीद है।

पूर्वी भारत में कपड़ा और रेशम उद्योग को नई गति देने के उद्देश्य से यहां दौरे पर आये केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने आज दिन में पश्चिम बर्धमान जिले में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की जिसमें प्रदेश के रेशम उत्पादन को दोगुना करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी) और राज्य के विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में बुनियादी ढाँचे से जुड़ी बाधाओं को दूर करने, सुविधाओं को बेहतर बनाने और पूरे क्षेत्र में टिकाऊ कृषि मॉडल लागू करने पर विचार-विमर्श किया गया।मंत्री ने अधिकारियों के समक्ष पश्चिम बंगाल के वार्षिक रेशम उत्पादन को बढ़ाकर 5,000 टन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

श्री सिंह ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मंत्रालय ने राज्य के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। इसमें चॉकी रियरिंग सेंटर (सीआरसी) के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि स्थानीय किसानों को स्वस्थ और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले युवा रेशम के कीड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इससे फसल की मृत्यु दर में काफी कमी आने की उम्मीद है।

अधिकारियों के अनुसार आज की बैठक में हर वर्ष रेशम के कीड़ों के पालन का एक अतिरिक्त चक्र शुरू करने की तकनीकी व्यवहार्यता पर भी चर्चा हुई। इससे भूमि और संसाधनों का अधिकतम उपयोग करके रेशम उत्पादक किसानों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है। समीक्षा बैठक में कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।

इन अधिकारियों में दीपांकर चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव (कपड़ा), केंद्रीय रेशम बोर्ड, फाल्गुनी रॉय, संयुक्त निदेशक (कपड़ा), पश्चिम बंगाल नीरज कुल्हारी, उप जूट आयुक्त, एस. पाणिग्रही, प्रबंध निदेशक, भारतीय जूट निगम, शशि भूषण सिंह, प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय जूट बोर्ड, लक्ष्मण वासक, उप निदेशक, बुनकर सेवा केंद्र और बीरेंद्र मरांडी, सहायक निदेशक, क्षेत्रीय कपड़ा आयुक्त कार्यालय तथा वैज्ञानिक डॉ. खस्रू आलम, सुपर्णा साहा, डॉ. गंगूबाई एस मनगुली शामिल हुए। बैठक में राज्य तथा जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

समीक्षा बैठक के बाद श्री सिंह ने जामुड़िया स्थित श्री मां टेक्सटाइल्स संयंत्र का दौरा कर जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय बुनकरों और उद्यमियों से सीधे बातचीत की तथा कपड़ा उद्योग के उत्पादन और विपणन से जुड़े क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियों का जायजा लिया। उनके साथ मां उद्योग समूह के चेयरमैन विजय शर्मा भी थे जिन्होंने समूह की उत्पादन क्षमता दोगुनी करने में रुचि दिखाई है।

समीक्षा बैठक और फैक्ट्री के दौरे के समापन पर केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि केंद्र सरकार प्रौद्योगिकी के एकीकरण, मजबूत वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ा बुनियादी ढाँचा विकसित करके पश्चिम बंगाल के पारंपरिक बुनकरों और किसानों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल को भारत के प्रमुख रेशम उत्पादक राज्यों में स्थापित करना है।

उन्हाेंने कहा, “गारमेंट उद्योग देश में रोजगार सृजन का सबसे बड़ा माध्यम है। इसमें एक करोड़ रुपये के निवेश से 50 लोगों को रोजगार मिल सकता है। नरेंद्र मोदी सरकार पश्चिम बंगाल को देश के कपड़ा, गारमेंट और जूट क्षेत्रों में उसकी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस दिलाने में मदद करेगी। जामुड़िया को टेक्सटाइल हब बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर मैं मंत्रालय में चर्चा करूँगा और उसी के अनुरूप काम किया जाएगा।”

श्री सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों से तृणमूल कांग्रेस सरकार के रवैये के कारण पश्चिम बंगाल का कपड़ा, गारमेंट और जूट उद्योग देश के अन्य हिस्सों की तुलना में पिछड़ गया है।

श्री शर्मा ने कहा “हम अपने गारमेंटिंग डिवीजन की उत्पादन क्षमता को प्रतिदिन 1,500 यूनिट से बढ़ाकर कम से कम 5,000 से 6,000 यूनिट करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘ निकट भविष्य में हम एक टेक्सटाइल प्रोसेसिंग डिवीजन भी स्थापित करेंगे। इसके लिए हमें पश्चिम बंगाल में समग्र कपड़ा उद्योग को सुरक्षित रखने वाली उचित नीतियों और ढाँचागत समर्थन की आवश्यकता होगी, क्योंकि हमें कपड़ा उद्योग का पूरा इकोसिस्टम विकसित करना है।’

श्री शर्मा ने कहा कि अब तक इस क्षेत्र में 150 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। नई औद्योगिक नीति की घोषणा के बाद हम इस क्षेत्र में 150 करोड़ रुपये का और निवेश करने और जामुड़िया को राज्य का टेक्सटाइल हब बनाने की योजना की हमारी योजना है।

 

 

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