सहारनपुर, 05 नवम्बर (वार्ता) उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि योगी आदित्यनाथ सरकार गन्ना किसानों के लिए चालू पेराई सत्र 2026-27 में गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) अवश्य बढ़ाएगी। पूरे राज्य में करीब 50 लाख गन्ना किसान हैं और 100 विधानसभा सीटों पर गन्ने और इससे जुड़ी अर्थ व्यवस्था का सीधा प्रभाव पड़ता है। पिछले पेराई सत्र में योगी सरकार ने गन्ना परामर्श मूल्य में 30 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी।
अगैती प्रजाति के गन्ने का एसएपी 400 रूपए और सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 300 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया था। उत्तर प्रदेश उन कुछ राज्यों में शामिल है जहां सरकार गन्ने का एसएपी तय करती है। उत्तर प्रदेश में गन्ना और उससे जुड़ी राजनीति का बहुत महत्व है। उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख गन्ना और चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल है। आमतौर पर यह देखा गया कि चुनावो से ठीक पहले राज्य सरकार किसानों को खुश करने के लिए गन्ना मूल्य में वृद्धि करती है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनावों से पूर्व गन्ना उत्पादक किसानों को भरोसा दिया कि सरकार बनने पर गन्ना आपूर्ति के 24 घंटे के भीतर भुगतान कराया जाएगा। प्रदेश में गन्ना पेराई सत्र शुरू हो चुका है लेकिन राज्य सरकार ने एसएपी पर फैसला नहीं किया है।
सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में प्रदेश के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल चीनी मिलों और किसान प्रतिनिधियों के साथा बैठकें कर चुके हैं। किसानों ने गन्ने की लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए गन्ना मूल्य साढ़े चार सौ से पांच सौ रूपए करने के ठोस तर्क दिए। जबकि चीनी मिल मालिकों ने गन्ना मूल्य ना बढ़ाए जाने के पक्ष में दलिलें दीं। महत्वपूर्ण है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपनी सरकार के 10 सालों के दौरान 2017-18 में 10 रूपए बढ़ाए थे। 2018-19, 2019-20, 2020-21, 2021-22, 2022-23 और 2024-25 में गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। योगी सरकार ने 25 रूपए 2021-22 और 20 रूपए 2023-24 और 30 रूपए 2025-26 में बढ़ाए थे।
अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने केवल एक बार 2016-17 में चुनाव के मौके पर 25 रूपए की वृद्धि की थी। पिछले 20 सालों में मायावती अकेली ऐसी नेता हैं जिन्होंने अपने 2007 से 2012 के बीच मंत्रित्व कार्यकाल के दौरान चार बार गन्ना मूल्य में भारी इजाफा किया था। 2009-10 में 25 रूपए, 2010-11 में 40 रूपए, 2011-12 में 35 रूपए और 2012-13 में 40 रूपए की वृद्धि की थी।
दिलचस्प है कि मायावती को किसान समर्थक नेता नहीं माना जाता है। इसके बावजूद उन्होंने गन्ना किसानें के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
