नई दिल्ली, 5 नवंबर (वार्ता) मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लि (एमओएफएसएल) की गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट अवधि में उपस्थित चुनौतियों के बावजूद कीमती धातुओं का दीर्घकालिक परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है। सर्राफा बाजार में पिछले वर्ष की असाधारण तेजी के बाद इस वर्ष सोने और चांदी के बाजार में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव दिख रहा है। कीमती धातुओं के बाजार पर इस तिमाही रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में आने वाली गिरावट निवेशकों के लिए चरणबद्ध तरीके से निवेश बढ़ाने का अवसर प्रदान कर सकती है। “गोल्ड’स् रैली: डिफर्ड, नॉट डीरेल्ड” शीर्षक रिपोर्ट कहा गया है कि जनवरी 2026 में सोने की कीमत लगभग 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी, जिसके बाद इसमें गिरावट आई और कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे चली गई है। हालांकि, इसके बाद सोने की कीमतों में फिर से सुधार देखने को मिला।
इस दौरान चांदी की कीमत 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार करने के बाद अपेक्षाकृत अधिक तेजी से नीचे आयी। डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में बदलाव के कारण घरेलू बाजार में भी इन उतार-चढ़ाव का प्रभाव देखने को मिला। वर्ष 2025 में कीमती धातुओं में मुख्य रूप से एकतरफा तेजी देखने को मिली थी। इस वर्ष सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रमुख कारणों में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती अपेक्षाएं, लगातार बनी हुई महंगाई, ऊंची बॉन्ड यील्ड (बांड में निवेश पर प्रतिफल) और भू-राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैं।
भारत में दिवाली और धनतेरस सोने एवं चांदी की खरीदारी के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में शामिल हैं। ऐतिहासिक रुझानों से पता चलता है कि त्योहारों के दौरान मांग का संबंध अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में घरेलू बाजार में प्रीमियम, आयात और भौतिक खरीद की मात्रा से अधिक होता है।
दिवाली के दौरान सोने की घरेलू कीमत वर्ष 2016 में लगभग 30,000 रुपये से बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 1.50 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह पिछले एक दशक में सोने की कीमतों में हुई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, दिवाली से पहले के 30 दिनों में सोने ने सामान्यतः दिवाली के बाद के 30 दिनों की तुलना में बेहतर प्रतिफल दिया है। वर्ष 2025 में यह रुझान विशेष रूप से स्पष्ट रहा, जब दिवाली से पहले के एक महीने में सोने की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत और चांदी की कीमतों में करीब 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर होने के बावजूद निवेश की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान वैश्विक गोल्ड इटीएफ होल्डिंग्स में लगभग 187 टन की वृद्धि हुई, जिससे कुल होल्डिंग्स बढ़कर 4,256 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। वहीं, तीसरी तिमाही में गोल्ड इटीएफ में निवेश का प्रवाह रिकॉर्ड 31 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। भारत में सितंबर 2026 के दौरान गोल्ड इटीएफ में निवेश का प्रवाह पिछले महीने की तुलना में 71 प्रतिशत बढ़कर 44.5 अरब रुपये हो गया। वहीं, सिल्वर इटीएफ में 19.7 अरब रुपये का निवेश आया। दूसरी ओर, भारत में सोने का आयात अगस्त के 2.3 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर सितंबर में 1.8 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। इसका प्रमुख कारण सोने की ऊंची कीमतों के साथ-साथ बुलियन के आयात को नियंत्रित करने के लिए किए गए उपाय रहे।
कीमती धातुओं को प्रभावित करने वाले कारकों पर टिप्पणी करते हुए मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के हेड ऑफ रिसर्च – कमोडिटीज, नवनीत दमानी के अनुसार “वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अपनी महत्ता बनाए हुए है। हालांकि, निकट भविष्य में इसकी कीमतों की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, महंगाई के रुझान, अमेरिकी डॉलर की चाल और वास्तविक बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा कि सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर इसे 3.75 से 4.00 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचाने से सख्त मौद्रिक परिस्थितियों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसके बावजूद, केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने की रणनीति, निवेश की निरंतर मांग और राजकोषीय अनिश्चितताएं सोने को दीर्घकालिक समर्थन प्रदान कर रही हैं। भारत में सोने की ऊंची कीमतों के कारण आभूषणों की विवेकाधीन मांग में कमी आई है, हालांकि विवाह से संबंधित खरीदारी और निवेश की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।”
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी कहते हैं, “अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर ऊंची यील्ड और डॉलर की मजबूती ने कीमतों पर दबाव बनाया है, लेकिन इसके बावजूद निवेश की मूलभूत मांग उत्साहजनक बनी हुई है। वैश्विक गोल्ड इटीएफ होल्डिंग्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं और तीसरी तिमाही के दौरान इनमें उल्लेखनीय निवेश आया है। इससे स्पष्ट होता है कि हालिया गिरावट के बावजूद निवेशकों की सोने में रुचि बनी हुई है। दूसरी ओर, चांदी में अधिक लाभ की संभावना है, लेकिन इसके साथ कीमतों में काफी अधिक उतार-चढ़ाव का जोखिम भी जुड़ा हुआ है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे चलकर अमेरिकी वास्तविक ब्याज दर की दिशा सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कारक बनी रहेगी। ऊंची यील्ड और मजबूत डॉलर के कारण निकट अवधि में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और कीमतों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि, लगातार बनी हुई महंगाई, राजकोषीय चिंताएं, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने निवेश भंडार में विविधता लाने की रणनीति मध्यम से दीर्घ अवधि में कीमती धातुओं को समर्थन दे सकती है।
कंपनी के जिंस बाजार के अनुसंधान प्रमुख नवनीत दमानी और कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी ने कहा अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के लिए 3,800 से 3,900 डॉलर प्रति औंस का स्तर चरणबद्ध निवेश के लिए अनुकूल क्षेत्र हो सकता है। वहीं, निकट अवधि में 4,200 डॉलर और मध्यम अवधि में 4,500 से 4,700 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। घरेलू बाजार में, यदि डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 96 मानी जाए, तो 1,35,000 रुपये का स्तर सोने में निवेश बढ़ाने के लिए अनुकूल हो सकता है। इसके लिए निकट अवधि का लक्ष्य 1,48,000 रुपये और मध्यम अवधि का लक्ष्य 1,60,000 से 1,68,000 रुपये निर्धारित किया गया है।

