सीहोर। जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को पालने-पोसने में पूरी जिंदगी लगा दी, बुढ़ापे में उन्हीं की देखभाल को लेकर बेटे आपस में बंटवारा करने लगे. चार बेटों ने बीमार मां को तीन-तीन महीने अपने पास रखने का फैसला किया था, लेकिन इस व्यवस्था में भी विवाद होने लगे. मामला सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत तक पहुंचा, जहां समझाइश के बाद सभी बेटों ने माता-पिता की देखभाल मिलकर करने और मां को अपनी इच्छा से कहीं भी रहने की सहमति दी.
एसपी सोनाक्षी सक्सेना के निर्देश पर आयोजित सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की बैठक एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे के नेतृत्व में हुई. इसमें कोर कमेटी सदस्य अनिल पालीवाल, साधुराम शर्मा और कमल सिंह ठाकुर मौजूद थे. 75 वर्षीय महिला ने शिकायत की कि वह करीब 40 वर्षों से पिता के मकान में रह रही हैं, लेकिन छोटी बहन मकान खाली करने का दबाव बना रही है. पंचायत ने स्पष्ट किया कि जबरदस्ती मकान खाली कराने का दबाव नहीं बनाया जा सकता. वसीयत संबंधी विवाद का समाधान सक्षम न्यायालय से कराया जा सकता है.
इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र के एक बुजुर्ग का खेत का रास्ता रोकने का मामला सामने आया. दोनों पक्षों की सहमति से रास्ता देने पर सहमति बनी. वहीं मंडी थाना क्षेत्र में पड़ोसी द्वारा घर का रास्ता बंद करने की शिकायत पर संबंधित व्यक्ति ने समस्या का तत्काल समाधान करने का भरोसा दिया.
एक अन्य मामले में 65 वर्षीय बुजुर्ग के चार बेटे और दो बेटियां हैं. संपत्ति बंटवारे के बावजूद विवाद और मुकदमे चल रहे थे. पंचायत की समझाइश पर गांव की भूमि छह हिस्सों में बांटने तथा माता-पिता के भरण-पोषण की जि मेदारी मिलकर निभाने पर सहमति बनी. मां को अपनी इच्छा से रहने की स्वतंत्रता भी दी गई. अन्य प्रकरणों में दस्तावेज और पक्षकारों की उपस्थिति के लिए अगली तारीख तय की गई.
