नई दिल्ली, दुनिया भर के अलग-अलग देशों में रहने वाले लोगों की शारीरिक बनावट और औसत लंबाई में काफी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एनसीडी रिस्क फैक्टर कोलैबोरेशन के एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार, दुनिया में सबसे लंबे पुरुष नीदरलैंड्स (डच) के हैं, जिनकी औसत लंबाई 183.8 सेंटीमीटर रिकॉर्ड की गई है। वहीं दूसरी ओर, सबसे कम औसत लंबाई वाले पुरुष पूर्वी तिमोर (160.1 सेमी) में पाए जाते हैं। यह रिपोर्ट 200 देशों और क्षेत्रों के 6.5 करोड़ से अधिक 19 वर्षीय युवाओं के शारीरिक आंकड़ों के गहन विश्लेषण पर आधारित है।
डेयरी उत्पाद, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और बचपन में मिलने वाला संतुलित पोषण है नीदरलैंड के नागरिकों की लंबाई का मुख्य राज
विशेषज्ञों का कहना है कि नीदरलैंड के लोग हमेशा से दुनिया में सबसे लंबे नहीं थे, बल्कि पिछले 150 वर्षों में उनके खान-पान और स्वास्थ्य मानकों में आए क्रांतिकारी बदलावों ने यह स्थिति बनाई है। डच भोजन में दूध, पनीर और दही जैसे डेयरी उत्पादों का भरपूर उपयोग होता है, जो हड्डियों के पूर्ण विकास में मदद करते हैं। इसके विपरीत, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया तथा मध्य अमेरिका के कई देशों में बचपन का कुपोषण, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बच्चों की शारीरिक लंबाई के विकास में बड़ी बाधा बनकर सामने आई है।
भारत में पुरुषों की औसत लंबाई 166.5 सेंटीमीटर दर्ज, चीन और पाकिस्तान के मुकाबले भारतीय पुरुषों का कद है थोड़ा छोटा
वैश्विक आंकड़ों की तुलना में दक्षिण एशियाई देशों का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है। अध्ययन के अनुसार, भारत में 19 साल के पुरुषों की औसत लंबाई 166.5 सेंटीमीटर दर्ज की गई है, जो 173.1 सेंटीमीटर के वैश्विक औसत से काफी कम है। हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में पुरुषों की औसत लंबाई 167.3 सेंटीमीटर है, जबकि चीन में यह आंकड़ा 175.7 सेंटीमीटर, दक्षिण कोरिया में 175.5 सेंटीमीटर और जापान में 172.1 सेंटीमीटर है। इन आंकड़ों से साफ है कि बेहतर पोषण और स्वच्छता के दम पर एशियाई देश भी अपनी भावी पीढ़ियों के शारीरिक विकास को बेहतर बना सकते हैं।

