जलाशयों के पानी से बदली 81 आदिवासी परिवारों की तकदीर

जबलपुर। कुण्डम विकासखंड के आदिवासी परिवारों ने सामूहिक प्रयास और सहकारिता के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। पड़रिया, मेहगवां, कोलमुही और बैरागी गांवों के 81 आदिवासी परिवारों की आजीविका अब कोलमुही और मेहगवां जलाशयों में हो रहे मत्स्य पालन से संवर रही है। कभी रोजगार के लिए दूसरे क्षेत्रों में पलायन करने वाले इन परिवारों को अब गांव में ही काम मिल रहा है। मत्स्य पालन से समिति प्रतिवर्ष करीब 50 क्विंटल मछली का उत्पादन कर 4 लाख रुपए की शुद्ध वार्षिक आय अर्जित कर रही है।

दरअसल, क्षेत्र में जल संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद पर्याप्त संसाधनों और तकनीकी मार्गदर्शन के अभाव में ग्रामीण इनका पूरा उपयोग नहीं कर पा रहे थे। इसे देखते हुए पड़रिया की आदिवासी मत्स्य उद्योग सहकारी मर्यादित समिति को कोलमुही और मेहगवां जलाशयों में मत्स्याखेट एवं मत्स्य पालन के लिए 10 वर्ष का पट्टा दिया गया, जो 30 जून 2029 तक प्रभावी है। कोलमुही जलाशय का औसत जलक्षेत्र 10.75 हेक्टेयर और मेहगवां जलाशय का 21.52 हेक्टेयर है।

समिति ने मत्स्य विभाग जबलपुर से मत्स्य बीज प्राप्त कर दोनों जलाशयों में योजनाबद्ध तरीके से मत्स्य पालन शुरू किया। जलाशयों के बेहतर प्रबंधन और व्यवस्थित मत्स्याखेट से उत्पादन में वृद्धि हुई। वर्तमान में समिति प्रतिवर्ष लगभग 50 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रही है। मछलियों की बिक्री से होने वाली आय के बाद समिति को सालाना करीब 4 लाख रुपए की शुद्ध आमदनी हो रही है।

सरकारी योजनाओं से सदस्यों को सुरक्षा-

समिति की इस सफलता में सहकारिता के साथ शासकीय योजनाओं की भी अहम भूमिका है। सदस्यों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), दुर्घटना बीमा और नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) पर पंजीयन जैसी सुविधाओं से जोड़ा गया है। इससे मत्स्य पालन के कार्य को आर्थिक मजबूती मिलने के साथ सदस्यों को योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। महिला और पुरुष सदस्य मिलकर इस गतिविधि में भागीदारी कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार और नियमित आमदनी के अवसर मिलने से आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। कोलमुही और मेहगवां जलाशयों में मत्स्य पालन की यह पहल बताती है कि स्थानीय संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग, विभागीय सहयोग और सामूहिक भागीदारी ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

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