ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा में ग्राहकों के खातों से कथित रूप से ₹10.24 करोड़ की भारी धोखाधड़ी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीबीआई की गाजियाबाद स्थित एंटी करप्शन ब्रांच ने बैंक की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बैंक की एक महिला कर्मचारी दीपांशी ने अन्य अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल कर ग्राहकों की अनुमति के बिना करोड़ों रुपये की अनधिकृत निकासी की और उन्हें अपने करीबियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया। यह फर्जीवाड़ा पिछले तीन सालों से लगातार चल रहा था।
49 एफडी में गड़बड़ी और 70 करोड़ से अधिक का संदिग्ध लेन-देन आया सामने, जांच में बढ़ सकता है धोखाधड़ी का कुल आंकड़ा
पीएनबी की आंतरिक रिपोर्ट और शिकायत के अनुसार, अब तक की जांच में करीब 10.24 करोड़ रुपये की सीधी धोखाधड़ी पाई गई है, जिसमें आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, प्रियंका कुमारी, शांति देवी और सरोज देवी समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा, बैंक द्वारा सीबीआई को सौंपी गई सूची में 49 फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को समय से पहले बंद कर करीब ₹70.23 करोड़ के संदिग्ध ट्रांसफर का ब्योरा भी दिया गया है। बैंक प्रशासन का कहना है कि प्रभावित खातों और एफडी का मिलान अभी किया जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में धोखाधड़ी का यह आंकड़ा और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज, सीबीआई की टीमों ने शुरू की संभावित ठिकानों पर छापेमारी
सीबीआई ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी बैंक कर्मचारी दीपांशी, आशुतोष पाठक तथा अन्य अज्ञात निजी व सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, आईटी एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक केस दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस वित्तीय घोटाले में बैंक के कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे और गबन की गई राशि को कहां ठिकाने लगाया गया है। सीबीआई की अलग-अलग टीमें मामले से जुड़े आरोपियों के ठिकानों और रिकॉर्ड्स को खंगालने में जुटी हुई हैं।

