G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने दी चेतावनी, कहा – सैन्य समाधान काम नहीं करेंगे, कूटनीति को देना होगा मौका

अटलांटा/वॉशिंगटन,  अमेरिका के अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए सैन्य विकल्पों को नकारते हुए कूटनीति को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन में जारी गंभीर संघर्षों के बीच, सैन्य समाधान टिकाऊ नहीं हो सकते और अब बातचीत व कूटनीतिक रास्तों को मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन भू-राजनीतिक संकटों ने वैश्विक स्थिरता के लिए नई चुनौतियां और दबाव पैदा कर दिए हैं, जिनका समाधान केवल शांतिपूर्ण संवाद से ही संभव है।

नाविकों और नागरिक जहाजों पर हमलों से ईंधन-भोजन संकट गहराया, ग्लोबल साउथ पर पड़ रहा है सबसे ज्यादा बुरा असर

विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के दौरान लाल सागर और अन्य प्रमुख समुद्री मार्गों पर नागरिक जहाजों तथा नाविकों पर होने वाले हमलों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से UNCLOS के दायरे में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने और इन हमलों को रोकने की सख्त जरूरत बताई। जयशंकर ने चिंता व्यक्त की कि इन हमलों के कारण ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) को सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जिससे ईंधन, भोजन और उर्वरकों की आपूर्ति बाधित हो गई है और उनकी कीमतें आसमान छू रही हैं। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि रणनीतिक हिसाब-किताब के चक्कर में आतंकवाद के खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक बेहद जोखिम भरा खेल है जो अंततः इसे अंजाम देने वालों के लिए ही मुसीबत का सबब बन जाता है।

आपूर्ति श्रृंखलाओं को हथियार बनाकर औद्योगीकरण रोकने की कोशिश पर जताई कड़ी आपत्ति, ‘क्वाड’ बैठक में भी शामिल होंगे जयशंकर

औद्योगिक और आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि बाजारों में कृत्रिम बाढ़ लाकर, आपूर्ति श्रृंखलाओं को हथियार बनाकर, और बाजार विकृतियों को प्रोत्साहित करके विकासशील देशों के औद्योगीकरण के अधिकार से इनकार किया जा रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने दुनिया के जोखिम को कम करने और विविधता लाने के लिए लचीली और वैकल्पिक कनेक्टिविटी के निर्माण के महत्व पर जोर दिया। अटलांटा प्रवास के दौरान जयशंकर जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के अपने समकक्षों के साथ ‘क्वाड’ (QUAD) मंत्रिस्तरीय बैठक में भी हिस्सा लेंगे, जो इस साल की दूसरी ऐसी बैठक होगी। इसके पश्चात, वे एंटीगुआ और बारबुडा जाएंगे, जहां वे 1 से 4 नवंबर तक ‘कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग’ में शिरकत करेंगे।

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