वाशिंगटन, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने देश में लगातार बनी हुई महंगाई के बीच अपनी नीतिगत ब्याज दरों में कोई फेरबदल न करते हुए इन्हें लगभग 3.9% के स्तर पर स्थिर रखा है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने स्पष्ट किया है कि बैंक पुराना असर देख रहा है और अर्थव्यवस्था से जुड़े आगामी आंकड़ों की समीक्षा के बाद ही अगला कदम तय किया जाएगा। हालांकि, ‘सीएमई फेडवॉच’ के अनुमानों और आर्थिक जानकारों की राय के मुताबिक, आगामी 8-9 दिसंबर को होने वाली अगली बैठक में फेड द्वारा ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी किए जाने की मजबूत संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक दबाव से इनकार करते हुए चेयरमैन वॉर्श ने कहा कि लक्ष्य केवल महंगाई पर काबू पाना है, कमेटी में दो सदस्यों ने जताया असंतोष
यह महत्वपूर्ण निर्णय अमेरिका में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से ठीक छह दिन पहले सामने आया है, जहां महंगाई और बढ़ता जीवन-यापन खर्च मुख्य मुद्दा बना हुआ है। इसके बावजूद, चेयरमैन केविन वॉर्श ने जोर देकर कहा कि इस आर्थिक फैसले का राजनीति या चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है और उनका एकमात्र उद्देश्य महंगाई को 2% के लक्षित दायरे में लाना है। हालांकि, ब्याज दरों को स्थिर रखने के इस फैसले पर फेडरल रिजर्व की कमेटी के भीतर मतभेद भी दिखे, जहां फेड गवर्नर लीसा कुक और क्लीवलैंड फेड की प्रेसिडेंट बेथ हैमैक ने तुरंत 0.25% दरें बढ़ाने के पक्ष में अपना असहमतिपूर्ण वोट दर्ज कराया।
ऊंची ब्याज दरों से एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और होम लोन बाजार पर पड़ रहा है असर, मजबूत जीडीपी ग्रोथ से अर्थव्यवस्था को मिल रहा संबल
लंबे समय से चली आ रही ऊंची ब्याज दरों के कारण अमेरिकी हाउसिंग मार्केट और लोन सेक्टर पर साफ असर दिख रहा है, जिससे हजारों नागरिकों के लिए घर खरीदना कठिन हो गया है। इसके अलावा, टेक सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लिए जाने वाले भारी कर्ज की रफ्तार भी अब धीमी पड़ने लगी है। इसके बावजूद, अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है जहां बेरोजगारी दर 4.2% के निचले स्तर पर है और तीसरी तिमाही की जीडीपी ग्रोथ 3% से अधिक रहने का अनुमान है, जो यह साबित करता है कि अमेरिकी बाजार इस वित्तीय दबाव को झेलने में सक्षम है।

