नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर (वार्ता) भारत और लिकटेंस्टाइन ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और कौशल विकास में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।
भारत की तीन दिन की यात्रा पर आये लिकटेंस्टाइन के युवराज एलोइस ने मंगलवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की । दोनों नेताओं ने निवेश, वित्तीय सेवाओं, कृषि, अंतरिक्ष, शिक्षा और उन्नत विनिर्माण में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि भारत-यूरोप व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य है। इस समझौते में लिकटेंस्टाइन भी शामिल है।
श्री जॉर्ज ने बताया कि दोनों पक्षों ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए दोहरे कराधान से बचाव संबंधी समझौते के प्रस्ताव पर भी चर्चा की। लिकटेंस्टाइन की कंपनियां भारत में निवेश और कारोबार के नए अवसर तलाश रही हैं। इस देश से भारत में अब तक कुल 11 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है।
उन्होंने कहा कि लिकटेंस्टाइन की कई कंपनियां भारत में पहले से मौजूद हैं। युवराज एलोइस ने वडोदरा में हिल्टी की नई विनिर्माण इकाई का दौरा भी किया। लिकटेंस्टाइन की कंपनी एल जी टी भारत में संपत्ति प्रबंधन और निवेश के क्षेत्र में काम कर रही है। कंपनी ने गुजरात के गिफ्ट सिटी में भी अपना कार्यालय खोला है। भारत लिकटेंस्टाइन को दवाइयों और बिजली से जुड़े सामान का निर्यात करता है, जबकि वहां से सटीक माप वाले उपकरण, मशीनें और अन्य यंत्र आयात किये जाते हैं।
दोनों देशों ने कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। इसमें संस्थानों के बीच साझेदारी, विशेषज्ञता का आदान-प्रदान और उद्योगों के साथ जुड़ाव शामिल है। भारत के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के स्तर पर ‘लिकटेंस्टाइन लैंग्वेजेज’ मॉडल के जरिए विदेश जाने वाले भारतीय पेशेवरों को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण देने की संभावना भी देखी जा रही है।
युवराज एलोइस 25 से 28 अक्टूबर तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं। यह उनकी भारत की पांचवीं यात्रा है। इससे पहले वह इसी साल फरवरी में एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने नयी दिल्ली आये थे और प्रधानमंत्री से मिले थे। यात्रा के दौरान उनका राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया और उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।
श्री जॉर्ज ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम भी शामिल रहे। दोनों पक्षों ने संघर्षों के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब मुख्य ध्यान यात्रा के दौरान बनी सहमति को ठोस परियोजनाओं, साझेदारियों और परिणामों में बदलने पर है।
दोहरे कराधान से बचाव संबंधी समझौते के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हमें लिकटेंस्टाइन से दोहरे कराधान से बचाव संबंधी समझौते का एक मसौदा प्राप्त हुआ है और हम इसकी जाँच करेंगे। यह वित्त मंत्रालय के अधिकार-क्षेत्र का विषय है, इसलिए विशेषज्ञ इस पर विचार करेंगे और देखेंगे कि यह हमें आगे आर्थिक सहभागिता बढ़ाने में किस प्रकार मदद करेगा। लिकटेंस्टाइन पक्ष ने भारत के साथ निवेश और व्यापार को और अधिक बढ़ावा देने के अपने प्रयासों के हिस्से के रूप में भारत के साथ यह समझौता करने में अपनी रुचि व्यक्त की है। इस पर चर्चा चल रही है।
