इंदौर: शहर के एक युवक का बैंक खाता उत्तर प्रदेश के दो जिलों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़ा मिला है. क्राइम ब्रांच की जांच में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के इस खाते से करीब पांच लाख रुपए का संदिग्ध लेन देन सामने आया है. खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी में होने के संदेह पर क्राइम ब्रांच ने युवक के खिलाफ केस दर्ज किया है.
जांच में सामने आया कि क्लॉथ मार्केट स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा में खुला यह खाता इंदौर के 21 वर्षीय कुशाल सिंह सिसोदिया के नाम पर है. राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय, गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल से मिले इनपुट के आधार पर खाते की जांच की थी. साइबर क्राइम पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस खाते का संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर और लखनऊ पश्चिम के ठाकुरगंज थाने में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से मिला है. हालांकि, अब तक सामने आई जानकारी में इन शिकायतों में ठगी गई रकम इसी खाते में आने की पुष्टि नहीं हुई है. मामले में डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी ने बताया कि खाते से हुए संदिग्ध लेन-देन की जांच की जा रही है, साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी.
क्या हैं म्यूल अकाउंट…
साइबर ठगी की रकम हासिल करने या उसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है,कई मामलों में ठग दूसरे लोगों को लालच देकर या उनके बैंकिंग दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ऐसे खाते खुलवाते हैं. इन खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसके स्रोत को छिपाने की कोशिश की जाती है. ऐसे खातों की जांच से साइबर ठगी में शामिल लोगों तक पहुंचने में मदद मिलती है.
