
इंदौर. शहर में चोरी होने वाले महंगे मोबाइल सिर्फ दूसरे शहरों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें नेपाल और थाईलैंड तक पहुंचाकर बेचे जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं. क्राइम ब्रांच की जांच में ऐसे एजेंट पकड़े जा चुके हैं, जो चोरी के फोन खरीदकर आगे खपाते थे. मोबाइल का आईएमईआई नंबर बदलने के बाद उसकी पहचान मुश्किल हो जाती है, जिससे पुलिस के लिए फोन तक पहुंचना चुनौती बन जाता है. मोबाइल चोरी के इस नेटवर्क में चोरों से फोन खरीदने वाले एजेंट अहम कड़ी हैं.
ये एजेंट चोरी के मोबाइल दूसरे शहरों में पहुंचाते हैं और कुछ मामलों में आईएमईआई नंबर बदलवाकर उन्हें आगे बेच देते हैं. एडीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया के अनुसार, मुंबई और दिल्ली में आईएमईआई नंबर बदले जाने के कारण कई मोबाइल ट्रेस नहीं हो पाते. क्राइम ब्रांच इंदौर में ऐसे एजेंटों को पकड़ चुकी है, जो महंगे मोबाइल नेपाल और थाईलैंड तक बेचने के लिए भेजते थे. इस बीच, मोबाइल बरामदगी के लिए क्राइम ब्रांच की कार्रवाई जारी है. इस साल अब तक एक हजार से अधिक मोबाइल खोजकर उनके मालिकों को लौटाए गए हैं, जिनकी कीमत दो करोड़ रुपए से ज्यादा है. थाना स्तर पर भी करीब एक करोड़ रुपए के मोबाइल बरामद किए हैं. हालांकि, हर साल गुम और चोरी होने वाले मोबाइल की अनुमानित कीमत दस करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है. एडीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया का कहना है कि जिन मोबाइल का आईएमईआई नंबर नहीं बदला जाता, उन्हें तकनीकी मदद से ट्रेस करना आसान होता है. नंबर बदलने के बाद मोबाइल की पहचान करना मुश्किल हो जाता है.
