बंगलादेशी सेना की कार्रवाई , चटगांव पहाड़ी क्षेत्र के 100 से अधिक मूल निवासी घायल : एसीएचआर

चटगांव, 23 अक्टूबर (वार्ता) एशियाई मानव अधिकार केंद्र (एसीएचआर) ने दावा किया है कि 22 अक्टूबर को बंगलादेश में चटगांव पहाड़ी क्षेत्र (सीएचटी) के साजेक में प्रदर्शनकारियों पर बंगलादेशी सेना की कार्रवाई में 100 से अधिक मूल निवासी घायल हो गये।

प्रदर्शनकारी ‘पार्बत्य चट्टग्राम जन संहति समिति’ (पीसीजेएसएस) के सशस्त्र कैडरों को हटाने की मांग कर रहे थे। वहीं मानव अधिकार समूह ने आरोप लगाया कि घटना को उजागर होने से रोकने के लिए घायलों को चिकित्सा उपचार से वंचित किया जा रहा है। साजेक गण अधिकार रक्षा समिति और साजेक कारबारी एसोसिएशन से जुड़े बौद्ध समुदाय के लोग पीसीजेएसएस के सशस्त्र कार्यकर्ताओं को हटाने की मांग को लेकर 11 अक्टूबर से रुक-रुक कर सड़कें जाम कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

एसीएचआर के अनुसार, जब 22 अक्टूबर को नाकाबंदी फिर से शुरू हुई, तो सेना के जवानों ने सशस्त्र समूह के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। रांगामाटी जिले का साजेक इलाका एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल है।

मानव अधिकार समूह ने सीएचटी क्षेत्रीय परिषद पर पीसीजेएसएस के निरंतर नियंत्रण पर भी सवाल उठाया है। संगठन का कहना है कि 1997 के शांति समझौते के बाद से बिना किसी चुनाव के यह परिषद जोतिरिंद्र बोधिप्रिय लर्मा (संतु लर्मा) के नेतृत्व में बनी हुई है। पीसीजेएसएस का गठन 1972 में एक विद्रोही समूह के रूप में हुआ था।

एसीएचआर के अनुसंधान प्रमुख तेजंग चकमा ने कहा, “कानून के शासन और संविधान शासित किसी भी देश को किसी सशस्त्र समूह के नेता को सीएचटी क्षेत्रीय परिषद जैसे कानूनी रूप से गठित निकाय का प्रमुख बनने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।”

श्री चकमा ने मुक्ति संग्राम मामलों के राज्य मंत्री इशराक हुसैन के हालिया मामले का जिक्र किया, जिन्हें नशा विरोधी अभियान के दौरान बन्दूक ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 19 अक्टूबर को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि पीसीजेएसएस कैडरों के पास रॉकेट लांचर, लाइट मशीन गन (एलएमजी), सबमशीन गन (एसएमजी), एके-47 श्रेणी की राइफलें और अन्य हथियार होने के आरोपों के बावजूद संतु लर्मा क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख पद पर क्यों बने हुए हैं।

अदालती दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए श्री चकमा ने कहा कि समूह के पास हथियार होने की बात पहले भी दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने मिजोरम के आइजोल में पीसीजेएसएस के तीन कैडरों से 31 एके-47 असॉल्ट राइफलें, एक सिंगापुर निर्मित एलएमजी, एक अमेरिकी निर्मित ब्राउनिंग ऑटोमैटिक राइफल, 809 कारतूस और 32 मैगजीन की जब्ती से संबंधित मामले ‘राष्ट्रीय जांच एजेंसी बनाम रोहमिंगलियाना’ में गौहाटी उच्च न्यायालय के पांच सितंबर, 2024 के फैसले का हवाला दिया।

एसीएचआर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सीएचटी क्षेत्रीय परिषद पर पीसीजेएसएस के निरंतर नियंत्रण के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया है और इस स्थिति की तुलना येवगेनी प्रिगोजिन के नेतृत्व वाले वैगनर ग्रुप से की है।

संगठन ने कहा कि यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से परे है। उसका तर्क है कि बंगलादेश का संविधान और दंड संहिता पीसीजेएसएस सहित सभी समूहों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए, जो क्षेत्रीय परिषद पर अपना नियंत्रण बनाये हुए है।

 

 

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