
शाजापुर, पिछले दिनों प्रदेश के नगरीय निकाय के प्रमुख सचिव द्वारा नगर पालिकाओं में खरीदी को लेकर जो भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए, जिसका वीडियो इन दिनों चर्चा में है. उसी तर्ज पर स्वास्थ्य विभाग में भी सिक्यूरिटी एजेंसियों के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार होता है. सीएमएचओ ऑफिस में अपने पसंद के ठेकेदारों को सिक्यूरिटी का काम दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी जाती है. शाजापुर में भी सिक्यूरिटी एजेंसी के नाम पर भ्रष्टाचार का ये खेल लंबे समय से जारी है, जिस पर आज तक कोई अंकुश नहीं लगा.
गौरतलब है कि जिले के समस्त स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मेन पॉवर रखने के लिए सिक्यूरिटी एजेंसी की निविदाएं बुलाई जाती है, जिनमें काम करने वालों को कलेक्टर दर से भुगतान होता है, लेकिन यहीं से खेल शुरू होता है कि सिक्यूरिटी एजेंसी का काम उसे ही दिया जाता है, जो सीएमएचओ ऑफिस या सिविल सर्जन की पसंद का हो. शाजापुर जिले में पिछले दिनों सिक्यूरिटी के टेंडर बुलाए गए थे, जिसमें 5 एजेंसियों ने भाग लिया था. इनमें से अधिकांश एजेंसियां विभिन्न कारणों से निविदा नियमों से बाहर हो गई हैं, लेकिन जो निविदाकर्ता पात्र है, उसे आज दिनांक तक नहीं खोला गया. यही कारण है कि यहां से भ्रष्टाचार की कहानी शुरू होती है कि आखिर जिसकी निविदाएं टेक्निकल और फाइनेंशियल की पात्रता रखती हैं, तो उन्हें काम क्यों नहीं मिल रहा है. सिक्यूरिटी एजेंसी के नाम पर ये ऐसा भ्रष्टाचार है, जिसमें लाखों रुपए का भ्रष्टाचार हर महीने किया जाता है.
इन लोगों ने डाला है टेंडर…
राज सिक्यूरिटी फोर्स प्रायवेट लिमिटेड, वल्र्ड क्लास सर्विस लिमिटेड, प्रथम नेशनल सिक्यूरिटी, कामथियन सिक्यूरिटी सर्विस, आरपीएसएम ग्लोबल प्रा. लिमिटेड, स्काई बुल सिक्यूरिटी, इगल हंटर साल्यूशन लिमिटेड की निविदा सीएमएचओ ऑफिस में आई थी. इसमें से अधिकांश एजेंसी तकनीकी और फाइनेंशियली शर्तों के कारण बाहर हो गई. जो निविदा की शर्तों पर खरा उतरा, उसका टेंडर आज दिनांक तक नहीं खोला जा रहा है. आखिर कारण क्या है कि ये टेंडर नहीं खोला जा रहा है. सीएमएचओ ऑफिस के पास एक जवाब है कि फाइल बनाकर कलेक्टर को भेज दी है. लेकिन दो महीने बाद भी आखिर सिक्यूरिटी का टेंडर कलेक्टर कार्यालय से क्यों नहीं खुला.
क्या कलेक्टर रोक पाएंगे ये फर्जीवाड़ा…?
लंबे समय से सीएमएचओ और सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा सिक्यूरिटी एजेंसी के नाम पर फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार का पुराना इतिहास है, लेकिन आज तक किसी भी कलेक्टर ने सिक्यूरिटी एजेंसी के फर्जीवाड़े पर न तो रोक लगाई, न कोई कार्यवाही की. जिले के नवागत कलेक्टर डॉ. परिक्षित संजय राव झाड़े जो खुद पेशे से एक डॉक्टर हैं, वे एजेंसी के नाम पर फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का इलाज कर पाएंगे या नहीं. इसका सबको इंतजार है. देखना यह है कि सिक्यूरिटी एजेंसी के लिए किसका टेंडर हुआ है, किसको काम मिला है. इसकी यदि बारीकी से जांच की जाए, तो ये भी नगरीय प्रशासन जैसा बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है.
