नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (वार्ता) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने उपग्रह फोन एवं दूरसंचार नेटवर्क सेवा प्रदाता स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस देने का विरोध करते हुए शुक्रवार को राजधानी में प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन दिया। स्टारलिंक अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी है और भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए रेडियो स्पेक्ट्रम तथा अंतिम अनुमति की प्रतीक्षा में है। श्री मस्क ने पिछले दिनों सोशल मीडिया एक्स पर टिप्पणी की थी कि उन्हें भारत के शक्तिशाली रिलायंस औद्योगिक घराने के करण प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। इस पोस्ट के लिए भारत के लोगों ने ‘एक्स’ पर कड़ी आलोचना की थी। संचार मंत्रालय ने श्री मस्क की टिप्पणी के बाद स्पष्ट किया कि सेटेलाइट (उपग्रहण) फोन सेवा के लिए स्टारलिंक के साथ ही दो भारतीय दूरसंचार कंपनियों- जियो और एयरटेल को भी प्रारंभिक लाइसेंस दिये गये है लेकिन उन्हें भी अभी स्पेक्ट्रम आवंटित नहीं किया गया है। सरकार ने कहा है कि परिचालन की अनुमति देने से पहले सुरक्षा संबंधी जांच की प्रक्रिया चल रही है।
हाल में यूक्रेन में स्टारलिंक की संचार सेवा की को धीमा किये जोने को लेकर भी श्री मस्क की यह कंपनी चर्चाओं में है। यूक्रेन का दावा है कि स्टारलिंक के नेटवर्क की गति सीमा कर कर दिये जाने से उसके सहारे चलने अपना मार्ग खोजने वाले ड्रोन की गति धीमी हो गयी और उसका वायुरक्षा तंत्र रूस के सामने कमजोर पड़ गया।
एसजेएम का यह प्रदर्शन नयी दिल्ली तीनमूर्ति चौक पर आयोजित किया गया था जो विदेशी राजनयिकों के आवास और कार्यालय क्षेत्र के नजदीक है। प्रदर्शनकारियों के हाथ में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था- ” स्टारलिंक को ना कहें। अपने डेटा की रक्षा करें! अपनी संप्रभुता की रक्षा करें!स्वदेशी का समर्थन करें!”
एसजेएम का नारा है- ” भारत को स्वदेशी समाधान चाहिए। विदेशी नियंत्रण नहीं।”
एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ अश्विनी महाजन ने कहा, ” श्री मस्क के स्वामित्व वाली कंपनी ‘स्टारलिंक’ ने भारत में वाणिज्यिक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएँ शुरू करने और संचालित करने के लिए लाइसेंस हेतु आवेदन किया था। उसे अभी तक परिचालन की अनुमति प्राप्त नहीं हुआ है। हालाँकि, उसके आवेदन को अस्वीकार भी नहीं किया गया है।”
उन्होंने कहा, ” यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर उनकी कंपनी से माँगे गये स्पष्टीकरणों का जवाब देने के बजाय, श्री एलन मस्क ने परोक्ष रूप से भारतीय व्यवसायों और सरकार पर आरोप लगाने का विकल्प चुना है। ऐसा प्रतीत होता है कि स्टारलिंक शायद उन विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है।”
डॉ महाजन ने कहा कि ऐसा लगता है कि एलन मस्क या तो सरकार पर जन-दबाव बनाकर लाइसेंस प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, या फिर हताशा में इस तरह के बयान दे रहे हैं।
एसजेएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन में आग्रह किया है सरकार स्टारलिंक को भारत में अपनी वाणिज्यिक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की अनुमति देने से इनकार करे।
ज्ञापन में कहा गया है, “स्वदेशी जागरण मंच का दृढ़ विश्वास है कि स्टारलिंक पर प्रतिबंध लगाने से अमेरिका जैसे व्यापारिक साझेदारों को एक स्पष्ट संदेश जायेगा कि यदि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ऊँचे आयात शुल्क लगाकर हस्तशिल्प उत्पादों जैसी भारतीय वस्तुओं के आयात पर मनमाने ढंग से प्रतिबंध लगाने का दुस्साहस करते हैं, तो भारत भी अपनी वास्तविक राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के आधार पर स्टारलिंक की सेवाओं पर रोक लगाने का पूरा अधिकार रखता है।”

