
सतना: तिथि और मुहूर्त बीत जाने के बाद भी शहर में लगातार तीन दिनों से मूर्ति विसर्जन जारी है. शांति समिति की बैठक में विसर्जन को लेकर बनाई गई पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था धराशायी हो गई है.सनातन परंपरा में नवरात्रि का पावन पर्व विशेष तिथियों और शुभ मुहूर्त के आधार पर मनाया जाता है. कलश और घटस्थापना से लेकर मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन तक हर कार्य शास्त्रीय मत और कालगणना अनुसार तय मुहूर्त के अनुसार संपन्न करने का विधान है. लेकिन शहर में इस वर्ष स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है. शहर और आसपास के इलाकों में पिछले तीन दिनों से बिना किसी मुहूर्त और तय समय-सीमा के, मनमाने ढंग से प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है.
जब की सनातन परंपरा में मुहूर्त का विशेष महत्त्व होता है यही कारण है की पंडित पुरोहित नियति समय और नियति मुहूर्त पर ही घट स्थापना की पूजा संपन्न कराते हैं. सनातन परंपरा अनुसार विसर्जन को तिथि और मुहूर्त निर्धारित होता है उसी मुहूर्त और लगन में मूर्ति विसर्जन किए जाने का विधान है. लेकिन मुख्य विसर्जन पर्व के बीत जाने के दो दिन बाद भी प्रतिमा विसर्जन का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. लगातार तीसरे दिन भी सड़कों पर झांकियों और प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस देखे गए. जिसकी वजह से शहर में जगह- जगह जाम भी लगा रहा. ताज्जुब की बात यह है कि इतना समय बीत जाने के बावजूद अभी भी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 10 प्रतिशत प्रतिमाओं का विसर्जन अभी भी होना बाकी है. बिना मुहूर्त और विलंब से हो रहे विसर्जन को लेकर अब प्रबुद्ध वर्ग और धर्मशास्त्रियों में भी नाराजगी देखी जा रही है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब घटस्थापना और पूजा-अर्चना के लिए एक-एक पल के मुहूर्त का ध्यान रखा जाता है, तो फिर विसर्जन के समय इस परंपरा और आस्था की अनदेखी क्यों की जा रही है.
खानापूर्ति तक सीमित रही शांति समिति की बैठक
अमूमन त्यौहार शुरू होने से पहले पुलिस और प्रशासनिक अमला शांति समिति की बैठकें आयोजित कर बड़े-बड़े दावे करता है. इन बैठकों में स्पष्ट रूप से नीति तय की जाती है कि एक ही निश्चित दिन और शुभ मुहूर्त में सभी प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न करा लिया जाएगा. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन प्रशासनिक बैठकों के निर्णय केवल कागजों और औपचारिकता तक ही सीमित रह गए हैं. नतीजतन शांति समिति की बैठकों में तय समय-सीमा का पालन कराने में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ है. समय पर विसर्जन न होने के कारण शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पुलिस बल को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ रही है.
शास्त्र मतानुसार नियत तिथि और लगन के अनुरूप ही अनुष्ठान का विधान है फिर चाहे घटस्थापना हो या प्रतिमा विसर्जन लेकिन तिथि और मुहूर्त के बाद मनमाने ढंग से जिस तरीके से प्रतिमा विसर्जित हो रही हैं यह शास्त्रीय परंपरा के विपरीत है जो कि धर्म के लिए चिंता का विषय भी है. – आचार्य पंडित रमाशंकर पांडेय
10 फ़ीसदी प्रतिमाओं का विसर्जन शेष –
शहर के तीनों थाने को मिलाकर तक़रीबन तीन सौ के लगभग प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं. ख़बर लिखे तक शहर में स्थापित 90 फीसदी प्रतिमाओं का विसर्जन ही हो पाया है शेष 10 फीसदी प्रतिमाओं का विसर्जन शुक्रवार को होगा
सिविल लाइन प्रभारी प्रीति विश्वकर्मा ने बताया कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र में 68 प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं जिनमे से लगभग 95 प्रतिशत प्रतिमाएं विसर्जित हो चुकी हैं और शेष शुक्रवार को विसर्जित होंगी. – प्रीति विश्वकर्मा, सिविल लाइन थाना प्रभारी
कोतवाली थाना प्रभारी हेमंत शर्मा से मिली जानकारी अनुसासर कोतवाली थाना क्षेत्र में 104 प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं गुरुवार शाम तक 90 प्रतिशत ही प्रतिमाओं का विसर्जन हो सका था. शेष प्रतिमाओं का विसर्जन शुक्रवार को किया जाएगा.
कोलगवाँ थाना प्रभारी सुदीप सोनी ने बताया की अभी उनके थाना क्षेत्र में 10 प्रतिशत मूर्तियों का विसर्जित नहीं हो सका जिनका विसर्जन शुक्रवार को होगा हला की थाना प्रभारी द्वारा थाना क्षेत्र में मूर्ती स्थापना के आंकड़े की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई.
