कच्चे तेल के सबसे बड़े उत्पादक देश यूएई में पेट्रोल की कीमतें हुईं आसमान पर, भारत से भी ज्यादा महंगे हुए दाम

नई दिल्ली, आमतौर पर यह आम धारणा रही है कि मध्य पूर्व और तेल उत्पादक देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम काफी कम होते हैं, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से सामने आए ताजा आंकड़े इस सोच को पूरी तरह झुठला रहे हैं। दुबई और यूएई के अन्य शहरों में अक्टूबर 2026 के दौरान ईंधन की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिसके चलते वहां पेट्रोल के दाम भारतीय बाजारों की तुलना में भी काफी अधिक हो गए हैं। भारत की राजधानी दिल्ली में जहां पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है, वहीं दुबई में ईंधन की नई दरों ने हर किसी को चौंका दिया है।

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा असर, कच्चे तेल की आपूर्ति हुई प्रभावित

विशेषज्ञों के अनुसार, यूएई और खाड़ी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में लगातार गहराता तनाव है। क्षेत्र में जारी सैन्य संघर्ष और सुरक्षा संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा असर रिफाइंड ईंधन के दामों पर पड़ रहा है। दुबई में हर महीने स्थानीय ईंधन मूल्य समिति द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर दरों की समीक्षा की जाती है, और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के चलते कीमतों में यह रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिला है।

आम जनता के रोजमर्रा के बजट पर पड़ रहा है सीधा असर, महंगाई बढ़ने की आशंका से परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर चिंतित

ईंधन की कीमतों में हुई इस अचानक वृद्धि से केवल आम नागरिकों की जेब पर ही बोझ नहीं बढ़ा है, बल्कि परिवहन, ट्रक, बस और माल ढुलाई (लजिस्टिक्स) से जुड़ी कंपनियों के परिचालन खर्च में भी भारी उछाल आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का यह दौर जारी रहा, तो इसका असर दुनिया भर के बाजारों में महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है, जिससे रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं से लेकर यातायात सेवाओं तक के दाम प्रभावित हो सकते हैं।

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