जगदलपुर, (वार्ता) छत्तीसगढ़ के बस्तर की पारंपरिक जनजातीय शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। इसी क्रम में मंगलवार को ‘आमचो बस्तर टूरिज्म’ पहल के तहत संचालित ‘बस्तर कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन’ पहुंचे एक विदेशी पर्यटक ने स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों की सराहना की और ‘अनुवेद’ ब्रांड के उत्पादों की खरीदारी की।
पर्यटक ने परिसर में प्रदर्शित ढोकरा कला (बेल मेटल), काष्ठ शिल्प, बांस कला और लौह शिल्प की कलाकृतियों का अवलोकन किया। पारंपरिक तकनीकों और स्थानीय शिल्पकारों की कलात्मक दक्षता से प्रभावित पर्यटक ने प्रसन्नता जताई और बस्तर की कला को यादगार के रूप में साथ ले जाने के लिए हस्तशिल्प उत्पाद खरीदे।
बस्तर कला गुड़ी परिसर का विकास राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी शिल्पकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए व्यवस्थित मंच उपलब्ध कराना है। इस पहल से पर्यटकों को स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पाद सीधे खरीदने का अवसर मिल रहा है, वहीं शिल्पकारों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद मिल रही है।
भ्रमण के समापन पर विदेशी पर्यटक ने कला गुड़ी की टीम और स्व-सहायता समूह की महिलाओं के साथ समूह तस्वीर भी खिंचवाई। इस दौरान परिसर में उत्साह का माहौल रहा।
