140 करोड़ नागरिकों के लिए अपार गर्व का क्षण लाने वाले खिलाड़ियों की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सबसे बड़ी उपलब्धि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और गौरव को ऊंचा करना है। उन्होंने इस सामूहिक राष्ट्रीय जीत के लिए खिलाड़ियों, उनके कोचों, सपोर्ट स्टाफ और परिवारों को बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इसलिए, आपकी सफलता केवल आपकी अपनी नहीं है; यह देश के करोड़ों नागरिकों की भी सफलता है।”
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि कैसे डॉ. कलाम का असाधारण जीवन और दूरदर्शी सोच आज भी देश का मार्गदर्शन कर रही है। श्री मोदी ने कहा, “उनका जीवन और उनका दृष्टिकोण हम सभी के लिए प्रेरणा है।”
एशियाई खेलों में हासिल की गई ऐतिहासिक उपलब्धियों को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने पुरुष और महिला हॉकी टीमों की दोहरी स्वर्ण जीत का जश्न मनाया-जिसमें महिला टीम ने 44 साल का लंबा इंतजार खत्म किया। इसके साथ ही, उन्होंने दोनों क्रिकेट टीमों के लगातार पदक जीतने और कबड्डी में दो स्वर्ण पदक हासिल करने की भी सराहना की। उन्होंने तीरंदाजी में 5 स्वर्ण पदक, शूटिंग, बॉक्सिंग और कुश्ती में शानदार प्रदर्शन, एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड, 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में पदक और 1982 के बाद मैराथन में मिली पहली सफलता की भी सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इस बार एशियाई खेल हमारे लिए कई मायनों में यादगार रहे हैं।”
भारत के कुल 85 पदकों में से 38 पदक (जिनमें 11 स्वर्ण शामिल हैं) जीतने वाली महिला खिलाड़ियों के असाधारण योगदान की तारीफ करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पदकों की संख्या केवल आंकड़ों से कहीं बढ़कर है और यह एक सशक्त ‘नए भारत’ को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कैसे भारतीय खिलाड़ियों ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, सॉफ्ट टेनिस और सेलिंग (नौकायन) जैसी स्पर्धाओं में पहली बार एशियाई खेलों के पदक जीतकर इतिहास रचा है। श्री मोदी ने कहा, “आज भारत उन खेलों में भी पदक जीत रहा है, जिनमें हमने एशियाई खेलों के इतिहास में पहले कभी कोई पदक नहीं जीता था।”
खिलाड़ियों को खेल के मैदान में और भी ऊंचाइयां छूने के लिए प्रेरित करते हुए, प्रधानमंत्री ने एक जोशपूर्ण संकल्प दिलाया, जिसमें सभी खिलाड़ियों ने एक साथ मिलकर कहा – “हम यह कर दिखाएंगे!” उन्होंने खिलाड़ियों से हर मैदान पर तिरंगे की शान बनाए रखने, देश के लिए खेलों में एक नई पहचान बनाने और हर खेल में नए चैंपियन तैयार करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा, “हमारे नाम और भी नए रिकॉर्ड होंगे, हम यह कर दिखाएंगे!”
कार्यक्रम स्थल की ओर ध्यान दिलाते हुए, प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को याद दिलाया कि यह स्टेडियम महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम पर है, जो रात-रात भर हॉकी का अभ्यास किया करते थे। उन्होंने मेजर ध्यानचंद के अटूट समर्पण का उदाहरण देते हुए बताया कि बड़े संकल्पों को पूरा करने के लिए वर्षों तक लगातार धैर्य और कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। श्री मोदी ने कहा, “उनकी यह कड़ी मेहनत हमें बार-बार याद दिलाती है कि संकल्प और सपने एक दिन में पूरे नहीं होते।”
खेल इकोसिस्टम को बेहतर बनाने के लिए पिछले 12 वर्षों में की गई कड़ी मेहनत का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने उस दौर को याद किया जब भारत को बहुत कम पदक मिलते थे और कई खेलों के बारे में तो जानकारी भी नहीं थी। उन्होंने बताया कि पहले ओलंपिक के आधे से अधिक खेलों में भारत की कोई भागीदारी ही नहीं होती थी। उन्होंने सवाल किया कि बिना प्रतियोगिता के मैदान में उतरे, कोई देश पदक जीतने की उम्मीद कैसे कर सकता है? “अगर हम प्रतिस्पर्धा ही नहीं करेंगे, तो पदक कैसे लाएंगे?”
राष्ट्रीय खेल नीति में आए एक निर्णायक बदलाव को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक उदासीनता और आत्म-संदेह को जड़ से खत्म करने के सरकार के दृढ़ संकल्प पर जोर दिया। उन्होंने आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी और उनके शानदार प्रदर्शन की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “हमने यह संकल्प लिया था कि हम इस निराशावादी सोच को दूर करेंगे!”
पिछले 10 से 12 वर्षों की दूरदर्शी सोच और ईमानदार प्रयासों का परिणाम बताते हुए, प्रधानमंत्री ने एक पारदर्शी और आधुनिक खेल इकोसिस्टम के निर्माण के बारे में विस्तार से बताया। इसमें ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (टॉप्स) और ‘खेलो इंडिया’ पहल का विस्तार शामिल है। उन्होंने बताया कि सरकार ने देश भर में खेल महासंघों और जमीनी स्तर के कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए भारी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “खेलो इंडिया का विस्तार करने और खेल महासंघों को मजबूत करने के लिए 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई।”
प्रधानमंत्री ने एक हजार से अधिक ‘खेलो इंडिया केंद्रों’ के माध्यम से जमीनी स्तर पर बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार के बारे में बताते हुए कहा कि देश के छोटे-बड़े शहरों में हजारों नए स्टेडियम, मल्टी-पर्पस हॉल, एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल और हॉकी के मैदान तथा स्विमिंग पूल बनाए जा रहे हैं। उन्होंने एथलीटों को मिलने वाली सीधी आर्थिक मदद का भी जिक्र किया, जिसमें टॉप्स योजना के तहत 50,000 रुपये का मासिक ‘आउट-ऑफ-पॉकेट अलाउंस’ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोचिंग के लिए दी जाने वाली फंडिंग शामिल है। श्री मोदी ने कहा, “अगर किसी खेल में कोचिंग के लिए देश से बाहर जाने की जरूरत पड़ती है, तो सरकार इसकी भी सुविधा दे रही है और इसके लिए आर्थिक मदद भी मुहैया करा रही है।”
प्रधानमंत्री ने विंटर गेम्स, सांसद खेल प्रतियोगिताओं और नई ‘खेलो भारत नीति’ के जरिए खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव दिलाने के प्रयासों पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने देश का मान बढ़ाने वाले दिव्यांग एथलीटों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों की जीत यह साबित करती है कि जब खिलाड़ियों को पता हो कि पूरा देश उनके सफर में उनके साथ खड़ा है, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज हर खिलाड़ी को यह भरोसा है कि उनके पूरे सफर में देश उनके साथ खड़ा है।”
प्रधानमंत्री ने 15 से 17 साल के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि कम उम्र से शुरुआत करने का एक अलग ही फायदा मिलता है। उन्होंने बताया कि ‘खेलो इंडिया’ और ‘इमर्जिंग खेलो इंडिया’ के जरिए 5 से 15 साल के बच्चों की पहचान करने और उन्हें प्रशिक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 2028 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक, 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) की मेजबानी और 2036 के ओलंपिक की मेजबानी करने के भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए, उन्होंने लाल किले से की गई उस घोषणा को याद दिलाया, जिसमें पूरे देश में गांव-गांव स्तर पर प्रतिभाओं की खोज (टैलेंट हंट) करने की बात कही गई थी। श्री मोदी ने कहा, “आने वाले समय में यही खिलाड़ी भारत के लिए पदक लेकर आएंगे।”
देश के बड़े संकल्पों पर अटूट भरोसा जताते हुए, प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के साथ मिलकर पूरे जोश के साथ “हम यह कर दिखाएंगे!” का नारा लगाया। उन्होंने खिलाड़ियों को बड़े वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी करने, दुनिया के शीर्ष खेल देशों की कतार में शामिल होने, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करने और भारत को एक वैश्विक खेल केंद्र (स्पोर्ट्स हब) बनाने के साझा लक्ष्यों के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत के हर कोने से एक चैंपियन निकलेगा, हम यह कर दिखाएंगे!” एशियाई खेलों की जीत को भारतीय युवाओं की व्यापक आकांक्षाओं से जोड़ते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे युवा इनोवेटर्स ने भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना दिया है। साथ ही, उन्होंने अंतरिक्ष, सैटेलाइट तकनीक, रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी नई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेलों की तरह ही, छोटे शहरों और गांवों के युवा इस उद्यमिता लहर को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्हें पिछले एक दशक में हुए व्यवस्थित सुधारों का समर्थन प्राप्त है, जिससे उन्हें यह भरोसा मिलता है कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। श्री मोदी ने कहा, “उन्हें पूरा विश्वास है कि अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए देश की पूरी ताकत उनके साथ है।”
खेलों में आई इस तेजी के व्यापक आर्थिक प्रभाव पर बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकारी पहलों का फायदा केवल मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ियों को ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों को भी मिल रहा है। उन्होंने खेल कोचिंग, फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग जैसे विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों के तेजी से उभरने का जिक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इससे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यम के नए रास्ते खुले हैं।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव रखने वाले पदक विजेताओं से अगली पीढ़ी को मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी उठाने का आग्रह करते हुए, प्रधानमंत्री ने उनसे स्कूलों में जाने, अपने पुराने खेल के मैदानों पर लौटने और अपने गांवों व शहरों के बच्चों के साथ बातचीत करने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि उनके कठिन अनुभवों को साझा करने से उन युवाओं को बहुत प्रेरणा मिल सकती है, जो उनके नक्शेकदम पर चलना चाहते हैं। श्री मोदी ने कहा, “हो सकता है कि आपका एक छोटा सा शब्द किसी बच्चे को खेलों में आगे बढ़ने का साहस दे दे।”
खेल के मैदान से परे खेलों के गहरे महत्व पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल जीवन भर के लिए अनुशासन, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता, दीर्घकालिक लक्ष्यों के प्रति दृढ़ता और हार के बाद फिर से उठ खड़े होने का जज्बा सिखाते हैं। उन्होंने बताया कि ये बुनियादी गुण स्वाभाविक रूप से हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाते हैं और हर चुनौती का सामना करने में हमारी मदद करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “खेल की यही भावना जीवन भर काम आती है।”
अपने संबोधन का समापन अपने खास मंत्र “जो खेलेगा, वही खिलेगा” के साथ करते हुए, प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के उत्साह को ‘नए भारत’ की सबसे बड़ी ताकत बताया और अंत में पूरे जोश के साथ कहा, “हम यह कर दिखाएंगे!” इसमें 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य शामिल हैं – जैसे कि दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना, ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाना, एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र (मैन्युफैक्चरिंग हब) बनना, तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व करना, अंतरिक्ष अन्वेषण और ओलंपिक की मेजबानी करना। उन्होंने उनके भविष्य के सभी टूर्नामेंटों और प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “इसी आत्मविश्वास के साथ, हमें भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।”
