पानसेमल : आदिशक्ति मां सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी की असीम कृपा से पानसेमल क्षेत्र की ऐतिहासिक कावड़ यात्रा इस वर्ष अपने 54वें वर्ष में पहुंच गई है।इस दिव्य परंपरा के प्रेरणा स्रोत ब्रह्मलीन उखा महाराज,जलगोन रहे जिनके द्वारा शुरू की गई यात्रा आज भी जारी है। वर्तमान में इस परंपरा के प्रमुख संचालक भटू महाराज कुलकर्णी हैं,जिनकी कावड़ के साथ प्रतिवर्ष 500 से 600 पदयात्री गढ़ जाते हैं।इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पानसेमल के दिलीप चित्ते एवं कानसुल के मनोहर तापकिरे भी करीब 35 से 40 वर्षों से इस पावन परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।
गुरुवार बंधारेश्वर तीर्थ पर कावड़ भरने के लिए दिलीप चित्ते एवं मनोहर तापकिरे द्वारा भी कावड़ भरी गई हैं ।वहीं रायचूल के वरिष्ठ पदयात्री सुरेश बर्डे द्वारा भी कावड़ भरी गई, जो कई वर्षों से उखा महाराज की कावड़ यात्रा में निरंतर शामिल हो रहे हैं।यात्रा दो क्रमों में संपन्न होती है। पहले क्रम में 2 माह पूर्व तीर्थराज उज्जैन से लाया गया मां शिप्रा का पवित्र जल पानसेमल के गायत्री मंदिर में विराजमान है, जिसकी नित्य पूजा-अर्चना और आरती हो रही है।दूसरे क्रम में नवरात्रि की पंचमी पर पानसेमल के समीप बंधारेश्वर तीर्थ पर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर कावड़ भरी गई।
इस कावड़ में शिप्रा मैया सहित मां नर्मदा, तापी, गोमाई एवं तीर्थ जल सम्मिलित है।सभी मंडलों का लक्ष्य एक ही है – मां सप्तश्रृंगी का जलाभिषेक। यह पावन जल 19 अक्टूबर को पानसेमल से गढ़ के लिए रवाना होगा। यात्रा अष्टमी से प्रारंभ होकर 7 दिन में गढ़ पहुंचेगी और कोजागिरी पूर्णिमा पर मां का जलाभिषेक होगा।यात्रा में महामंडलेश्वर स्वामी हंसानंद तीर्थ जी महाराज का सान्निध्य रहेगा। स्वामी जी द्वारा विश्राम स्थान पर सत्संग भी होगा । इस वर्ष क्षेत्र से कुल करीब 2000 पदयात्री मां के दरबार में पहुंचेंगे ।
