भोपाल। मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ बैठक कर आगे की कानूनी रणनीति पर चर्चा की। बैठक में प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी मौजूद रहे।
अधिकारियों को दस्तावेज तैयार करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने और उस पर अंतरिम रोक की मांग के लिए जरूरी तथ्य, आंकड़े और दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने उच्च न्यायालय के निर्णय से जुड़े विधिक पहलुओं और आगामी कानूनी कार्यवाही की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए सरकार हर संभव कानूनी कदम उठाएगी।
फैसले के बाद बदली स्थिति
जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर स्थिति बदल गई है। फैसले के मुताबिक, ओबीसी वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा। 27 प्रतिशत आरक्षण के तहत अतिरिक्त 13 प्रतिशत पदों को होल्ड रखने और उनके परिणाम जारी करने से जुड़ा मामला भी प्रभावित हुआ है।
13 प्रतिशत होल्ड पदों पर भी असर
वर्ष 2022 से 2026 के बीच हुई सरकारी भर्तियों में ओबीसी आरक्षण के अतिरिक्त 13 प्रतिशत पद होल्ड रखकर परिणाम जारी किए जा रहे थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फैसले में इन पदों को अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों से आगामी तीन महीने में भरने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार इस फैसले पर अंतरिम रोक लगवाने के लिए जल्द सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करना चाहती है।
15 अक्टूबर को जिलों में प्रदर्शन
इधर, 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर ओबीसी महासभा आंदोलन करेगी। महासभा 15 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेगी। महासभा के सदस्य लोकेंद्र गुर्जर ने बताया कि चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। नागपुर में विभिन्न संगठनों की बैठक में जनगणना के दौरान ओबीसी के लिए अलग कॉलम रखने और आरक्षण बढ़ाने की मांग को जन आंदोलन बनाने का निर्णय भी लिया गया है। नवंबर में बड़े आंदोलन की तैयारी है।
