इंदौर | शहर में सुगम यातायात को लेकर दिन में कलेक्टर शिवम वर्मा अधिकारियों को निर्देश देते रहे, लेकिन शाम होते-होते पाटनीपुरा चौराहे पर जाम ने व्यवस्था की पोल खोल दी। वाहन चालकों में आगे निकलने की होड़, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और लगातार बजते हॉर्न के बीच सड़क पर अव्यवस्था का नजारा दिखाई दिया। सवाल उठता है कि जब बैठकें और निर्देश लगातार हो रहे हैं, तो उनका असर सड़कों पर क्यों नहीं दिख रहा?
पाटनीपुरा चौराहे पर वाहन चालक सिग्नल और यातायात अनुशासन की परवाह किए बिना एक-दूसरे से आगे निकलने में जुटे रहे। चौराहे पर तैनात महिला पुलिसकर्मी मुस्तैदी से यातायात संभालने का प्रयास करती रहीं, लेकिन वाहन चालकों की मनमानी के कारण जाम की स्थिति बनी रही। यहां तक कि पुलिस की गाड़ी भी वाहनों के बीच फंसी नजर आई।
बैठक में निर्देश, सड़क पर वही हाल
कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में डायवर्सन और सर्विस रोड की मरम्मत, निर्माण कार्यों में तेजी, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधार तथा तेज रफ्तार वाहन चालकों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पैदल यात्रियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में विभागीय समन्वय पर भी जोर दिया गया।
लेकिन पाटनीपुरा का नजारा इन निर्देशों के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। यातायात सुधार की बैठकें तभी सार्थक होंगी, जब उनका असर चौराहों पर दिखाई देगा।
आखिर कब बदलेगी सड़कों की तस्वीर?
शहर में जाम और वाहन चालकों की मनमानी कोई एक दिन की समस्या नहीं है। जरूरत सिर्फ निर्देश जारी करने की नहीं, बल्कि नियमित निगरानी, पर्याप्त ट्रैफिक बल और नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की है।
सवाल साफ है—बैठकों में सुगम यातायात का खाका तैयार होता रहेगा या जिम्मेदार अधिकारी सड़कों पर उतरकर व्यवस्था भी सुधारेंगे? पाटनीपुरा का जाम प्रशासन के लिए चेतावनी है कि कागजी निर्देशों से नहीं, ठोस कार्रवाई से ही लोगों को राहत मिलेगी
