सतना: शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर शहर भर में भक्ति, उल्लास और धार्मिक अनुष्ठानों की धूम धूम छाई हुई है. इसी क्रम में पुरानी आबकारी स्थित नव दुर्गा उत्सव समिति द्वारा स्थापित की गई भगवान शिव और माता पार्वती की अलौकिक और भव्य झांकी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है.इस वर्ष समिति द्वारा पौराणिक प्रसंग समुद्र मंथन पर आधारित अत्यंत दर्शनीय झांकी तैयार की गई है. झांकी में दर्शाया गया है कि जब समुद्र मंथन के दौरान भीषण ‘हलाहल’ (कालकूट) विष निकला, तो पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान किया. विष का ताप इतना तीव्र था कि संपूर्ण ब्रह्मांड संकट में आ गया. उसी क्षण जगज्जननी मां भवानी (पार्वती) ने विष के प्रभाव को शिव जी के शरीर में फैलने से रोकने के लिए भक्ति और शक्ति भाव से भगवान शिव का कंठ पकड़ लिया. मां भवानी के इस स्पर्श से विष उनके गले में ही स्थिर रह गया और शिव जी नीलकंठ कहलाए. इस पौराणिक कथा को मूर्तिकारों ने इतनी बारीकी और जीवंतता से झांकी में संजोकर उकेरा है कि देखने वाले भावविभोर हो उठ रहे हैं.
झांकी में दिखे देव-दानव और कछुआ अवतार
भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति के नीचे सामने की ओर समुद्र मंथन का संपूर्ण दृश्य दर्शाया गया है जिसमे भगवान विष्णु के कच्छप (कछुआ) अवतार पर मंधराचल पर्वत विराजमान है. समुद्र मंथन के लिए पर्वत के चारों ओर वासुकी नाग लपेटे हुए हैं. जिसके एक तरफ़ दानव हैं और दूसरी तरफ देवता मिलकर वासुकी नाग की रस्सी बनाकर मंथन करते दिखाई दे रहे हैं. मुख्य मंच पर भगवान शिव का हलाहल पीते हुए नीलकंठ रूप और माँ भवानी का करुणामयी रूप स्थापित है. साथ ही माँ दुर्गा का भव्य स्वरूप भी स्थापित किया गया है।
दूर-दराज से पहुँच रहे श्रद्धालु
इस मनमोहक झांकी के दर्शन के लिए स्थानीय ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं. भगवान शिव और माता पार्वती की सुंदर घूमती हुई झांकी और समुद्र मंथन का सजीव चित्रण लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. शाम होते ही पंडाल जयकारों और महाआरती की गूँज से सराबोर हो जाता है.
65 वर्षों से समिति कर रही है घटस्थापना
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि तकरीबन 65 वर्षों से लगातार नवदुर्गा उत्सव समिति पुरानी आबकारी के पास घट स्थापना कर रही है प्रत्येक वर्ष किसी विशेष थीम पर प्रतिमाओं की झांकी स्थापित की जाती है. इसकी इसकी शुरुआत पेंडा वर्मा, शिवशरण कच्छवाहा, मनोज कच्छवाहा, संतोष गुप्ता ने की थी अब उन्ही के नक्शेकदम में उनकी निचली पीढ़ियाँ माई की भक्ति और भजन में निरंतर सक्रिय हैं
थीम के पीछे का कॉन्सेप्ट पर बोले समिति के पदाधिकारी :-
युवा पीढ़ी को हमारी सनातन संस्कृति और पौराणिक कथाओं से जोड़ने के उद्देश्य से इस प्रकार की विशेष सजीव झांकी का निर्माण कराया गया है. ताकि आने वाली पीढ़ी हमारे देवी देवताओं और अपनी संस्कृति का अनुसरण कर सकें. – विकास श्रीवास्तव
कई वर्षों से यहाँ प्रतिमा विराजित की जा रही है दौड़- भाग भरे वातावरण में नवरात्रि के नव दिन समाज के सभी आयु वर्ग के लोगों को एक साथ खड़ा कर देते हैं. माई की आराधना के साथ ही संस्कृति को अपने बच्चों के हाथे संजोने की ज़िम्मेदारी का यह ख़ास उत्सव है हमारी परंपरा को आंगे हमारे बच्चे निभायेंगे. – विमल कच्छवाहा
शारदीय नवरात्रि के उत्सव की तैयारियों को लेकर हमारे दिलो दिमाग़ में महीनों पहले से अलग ही जुनून छा जाता है. इस बार भगवान शिव और माता आदिशक्ति के साथ समुद्र मंथन की अद्भुत झांकी सजाई गई है जिसे देखने दूर- दूर से श्रद्धालु आ रहे हैं. – अमन वर्मा
नवरात्रि का यह पावन त्योहार हमारी अपनी संस्कृति, परंपराओं से जोड़ता है नवरात्रि के नौ दिन घर परिवार और समाज़ के सभी आयु वर्ग के लोग एक साथ एक जुट हो कर उत्साह पूर्वक माता की पूजा आराधन करते हैं मातारानी सभी के जीवन में ख़ुशियाँ लायें और ऐसे ही सामाजिक एक जुटता बनी रहे यही माता रानी से कामना है. – अभिषेक कछवाहा
