
नई दिल्ली, दिल्ली में काकरोच जनता पार्टी और वाम दलों के छात्र संगठनों का आंदोलन दिल्ली पुलिस के सख्त पहरे के बावजूद आंशिक रूप से जारी रहा. हालांकि दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर लगाई गई इस पूरी पाबंदी और गैर कानूनी तरीके से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में रखे जाने के खिलाफ यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया.
रविवार को हुई एक विशेष सुनवाई में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के मामले में सरकारी अधिकारियों से जवाब मांगा है. अधिकारियों को मंगलवार, 13 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें मेट्रो पाबंदियों और रेलवे एडवाइजरी का विवरण शामिल हो.
कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि सीजेपीके विरोध प्रदर्शनों के दौरान 10 अक्टूबर को मेट्रो स्टेशन बंद करने के लिए उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए? दरअसल, न्यायालय के सामने आंदोलन से जुड़े कई मुद्दों को आधार बनाकर विशेष याचिका दायर की गई थी. जिसमें 9 अक्टूबर के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन नहीं किए जाने,विरोध प्रदर्शनों के दौरान विपक्षी नेताओं और अन्य लोगों की एहतियाती हिरासत को चुनौती, छात्र नेताओं, पत्रकारों, वकीलों और राजनीतिक हस्तियों सहित 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने के मामले को लेकर एक साथ सुनवाई हुई. याचिका में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए गए थे. इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से चलें, जब तक कि सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी के कारण प्रतिबंध लगाना आवश्यक न हो जाए. न्यायालय ने निर्देश दिया कि इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रखी जाए, शहर में लोगों की आवाजाही की अनुमति दी जाए और कानून-व्यवस्था व अन्य यातायात स्थितियों को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड्स की आवश्यकता की तुरंत समीक्षा की जाए. न्यायालय ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि तय कानूनी प्रक्रिया के बिना किसी को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जाएगा.
जारी रहा विरोध
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन रविवार को पुलिस की भारी किलेबंदी के बावजूद जारी रहा.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को मुचलके पर जमानत मिलने के बाद इन नेताओं ने घोषणा कर दी कि पुलिस की किसी भी तरह की सख्ती के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक उनका जंतर-मंतर चलो आंदोलन-2 थमेगा नहीं और प्रदर्शन जारी रहेगा. इसके अलावा वाम दलों के छात्र संगठनों व आम आदमी पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में मार्च निकाला.
