जोधपुर (वार्ता) राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है कि रेगिस्तान में फूल खिलाने का हुनर हमें अच्छे से आता है।
श्रीमती राजे शुक्रवार को यहां हैप्पी आवर्स स्कूल द्वारा आयोजित एचएचएसएमयूएन-2026 कार्यक्रम में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि अपनी सबसे बड़ी चुनौती को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल देना हम राजस्थानियों की यही मजबूती है।
उन्होंने कहा “हम इसमें माहिर है। आसमान हमारी सीमाओं का अंत नहीं है। सदियों तक राजस्थान की जिस तेज धूप को चुनौती माना जाता था, आज उसी धूप से जोधपुर के पास भड़ला में हजारों मेगावाट बिजली पैदा हो रही है।” इस कार्यक्रम में मतदाता की आयु और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा भी हुई।
उन्होंने कहा कि एक मधुमक्खी अपने पूरे जीवन में एक चम्मच के बारहवें हिस्से जितना शहद बनाती है। उसका योगदान बहुत छोटा लगता है। लेकिन हजारों मधुमक्खियां मिलकर असंख्य छेदों वाला ऐसा छत्ता बनाती हैं, जिसकी संरचना का गणितीय प्रमाण जुटाने में वैज्ञानिकों को दो हजार वर्ष लग गए। ऐसे छोटे-छोटे प्रयास बड़ा काम कर देते हैं।
श्रीमती राजे ने कहा “मुख्यमंत्री के रूप में मैंने सीखा कि अच्छी नीति वह नहीं है,जो लोगों की मदद करे। अच्छी नीति वह है जो लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करे। हमने बेटियों को साइकिलें इसलिए दी ताकि स्कूल की लंबी दूरी उनकी शिक्षा में बाधा न बने। जल स्वावलंबन अभियान के माध्यम से गांवों को अपने पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए प्रोत्साहित किया। भामाशाह योजना के माध्यम से महिलाओं को परिवार की मुखिया बनाया। उनके नाम से बैंक खाते खुलवाए ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके ही खाते में पहुंच सके।”
