जबलपुर: हाईकोर्ट ने नियुक्ति के शुरुआती तीन वर्षों में कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का 70, 80 और 90 प्रतिशत भुगतान करने की शर्त को चुनौती देने वाली याचिका का निराकरण करते हुए संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं को पूरा न्यूनतम वेतन देने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने यह आदेश जबलपुर निवासी सत्यम गुप्ता, अभिक कुमार सिंह व यशोदा मरावी के अलावा उमरिया निवासी अंजली तिवारी की याचिका पर पारित किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शंकर प्रसाद सिंह ने पक्ष रखा।
याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति आदेश में शामिल उस शर्त को चुनौती दी थी, जिसके तहत परिवीक्षा के पहले तीन वर्षों में न्यूनतम वेतन का क्रमश: 70, 80 और 90 प्रतिशत भुगतान किया जाना था। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए बताया कि इसी तरह के मामलों में ऐसी शर्त को कानूनन गलत मानते हुए परिवीक्षा अवधि में न्यूनतम वेतनमान का पूरा भुगतान करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रवीण नामदेव ने विरोध करते हुए बताया कि पूरे वेतन के भुगतान संबंधी हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में डायरी नंबर के माध्यम से चुनौती दी गई है।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोई स्थगन आदेश नहीं दिया है। हाईकोर्ट ने इस तथ्य को देखते हुए याचिका का निराकरण कर दिया और 31 अक्टूबर 2025 के आदेश के अनुरूप लाभ देने के निर्देश दिए। साथ ही लाभ देने से पहले याचिकाकर्ताओं से अंडरटेकिंग-इंडेम्निटी बांड लेने को कहा, ताकि सुप्रीम कोर्ट में राज्य के पक्ष में फैसला होने पर अतिरिक्त भुगतान की राशि वापस की जा सके।
