नयी दिल्ली, 08 अक्टूबर (वार्ता) तंजानिया के अरुशा में आयोजित 153वीं अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) असेंबली में नेपाल के प्रस्ताव और भारत समेत अन्य देशों के समर्थन से हिमालयी क्षेत्र तथा अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में जलवायु से जुड़ी आपदाओं से निपटने और लचीलापन बढ़ाने का मुद्दा आपात एजेंडा में शामिल किया गया है। राज्यसभा सचिवालय ने गुरुवार को बताया कि भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को असेंबली के तीसरे दिन विभिन्न बैठकों और चर्चाओं में भाग लिया।
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, अपराजिता सारंगी, डॉ. संजय जायसवाल, कमलजीत सहरावत, डॉ. लता वानखेड़े, बिजुली कलिता मेधी और एन.के. प्रेमचंद्रन तथा राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा शामिल हैं। श्री हरिवंश ने विधानसभा की सामान्य बहस में सुशासन के लिए पारदर्शिता मजबूत करने, जवाबदेही बनाए रखने और जनता का भरोसा बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आईपीयू की निवर्तमान अध्यक्ष तुलिया एकसन से भी मुलाकात की।
सुश्री सारंगी ने संयुक्त राष्ट्र मामलों की स्थायी समिति की चर्चा में हिस्सा लिया। सुश्री मेधी ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर कार्यसमूह और सतत विकास संबंधी स्थायी समिति की चर्चा में भाग लिया। श्रीमती सहरावत ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानून के पालन में संसदों की भूमिका तथा बच्चों के अधिकारों के लिए नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कार्यशालाओं में हिस्सा लिया। डॉ. जायसवाल ने पीढ़ियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कार्यशाला में, डॉ. वानखेड़े ने बदलती जलवायु में स्वस्थ भोजन से जुड़ी कार्यशाला में और डॉ. पात्रा ने संघर्ष के समय समुद्री सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा पर विशेषज्ञ चर्चा में हिस्सा लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने रूस की फेडरेशन काउंसिल के उपसभापति कॉन्स्टेंटिन कोसाचेव के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की। राज्यसभा के महासचिव ने आईपीयू की नवनिर्वाचित महासचिव ए फिलिप से मुलाकात की और लोकतंत्र तथा शांति को बढ़ावा देने के लिए भारत की संसद के समर्थन की बात कही।

