अदन, 07 अक्टूबर (वार्ता) विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहानॉम गेब्रेयेसस ने बुधवार को चेतावनी दी कि यमन में बढ़ते संघर्ष का आम नागरिकों पर ‘विनाशकारी प्रभाव’ पड़ रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर विस्थापन हो रहा है और देश की चरमराती स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भारी दबाव पड़ रहा है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने बताया कि हिंसा के इस ताजा दौर में अब तक लगभग 1,000 लोग मारे गए हैं, 4,200 से अधिक घायल हुए हैं और करीब 1.98 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। इसके साथ ही हैजा और खसरा जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए डब्ल्यूएचओ की तत्काल फंडिंग आवश्यकता 90 लाख डॉलर से बढ़कर 3.1 करोड़ डॉलर हो गई है। यमन में सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच भीषण जंग दोबारा शुरू होने से स्थितियां बेहद गंभीर हो गई हैं। यमन के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में नए मोर्चे खुल गए हैं, जिनमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लाल सागर तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के इलाके शामिल हैं। यमनी सरकारी बलों ने पश्चिमी तटीय क्षेत्र में रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा और धुबाब के कुछ हिस्सों पर फिर से कब्जे का दावा किया है। हूतियों ने हालांकि इन दावों को खारिज कर दिया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि उन्होंने लाहेज में सऊदी समर्थित बलों पर दर्जनों हमले किए हैं, जिसमें 200 से अधिक लोग मारे या घायल हुए हैं। हूतियों ने रियाद सहित सऊदी अरब के क्षेत्रों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। इसके जवाब में सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने हूती नियंत्रित क्षेत्रों में हवाई हमले किए हैं।
यमन संघर्ष का क्षेत्रीय दायरा और व्यापक हो गया है। हूती हमलों के जवाब में पारस्परिक रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब में ‘निरोधक उपायों’ के रूप में तुर्की और पाकिस्तान द्वारा अपनी सेना तैनात करने के साथ ही ‘मक्का पैक्ट’ सक्रिय हो गया है। उल्लेखनीय है कि यमन संकट 2014 के अंत में शुरू हुआ था, जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हस्तक्षेप किया था। अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम से कुछ शांति आई थी, लेकिन हालिया जंग ने एक बार फिर यमन को लंबे और भीषण युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर

