नयी दिल्ली, 7 अक्टूबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी के भारतीय कृषि के बुनियादी बदलावों पर लिखा गया एक विशेष लेख साझा किया। इस लेख में प्रधानमंत्री के रूप में और उससे पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके 25 वर्षों के कार्यकाल के दौरान कृषि क्षेत्र में आए ऐतिहासिक और व्यापक परिवर्तनों जैसे बेहतर सिंचाई, विश्वसनीय बिजली, ग्रामीण सड़कों, प्रौद्योगिकी और बाजार तक पहुंच ने किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में के बारे में विस्तार से बताया गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की गई पोस्ट में बताया गया कि यह यात्रा दर्शाती है कि किस प्रकार बेहतर सिंचाई व्यवस्था, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, ग्रामीण सड़कों के निर्माण, आधुनिक प्रौद्योगिकी और बाजारों तक सीधी पहुंच ने किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय स्तर पर इस दृष्टिकोण का विस्तार कर किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता, फसल विविधीकरण और मजबूत ग्रामीण बुनियादी ढांचा प्रदान किया गया है।
श्री गुलाटी ने इस लेख में कहा है कि वर्ष 2001 से 2014 के दौरान गुजरात का कृषि मॉडल एक मिसाल बनकर उभरा। इस अवधि में राज्य की कृषि सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर औसतन 9 प्रतिशत प्रति वर्ष रही, जो उस समय देश के सभी प्रमुख राज्यों में सर्वाधिक थी। यह उपलब्धि किसी एक योजना का परिणाम न होकर एक एकीकृत और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का नतीजा थी।
राज्य में नर्मदा नहर प्रणाली के विस्तार, चेक डैम और माइक्रो-इरिगेशन (प्रति बूंद अधिक फसल) के साथ-साथ ‘ज्योतिग्राम योजना’ के माध्यम से कृषि के लिए 24 घंटे विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई। इसने सिंचाई की अनिश्चितता को समाप्त कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी। किसानों तक आधुनिक कृषि ज्ञान पहुंचाने के लिए ‘कृषि महोत्सव’ और ‘कृषि रथ’ जैसे नवाचारों की शुरुआत की गई। इनसे कृषि वैज्ञानिक, विस्तार अधिकारी और तकनीक सीधे किसानों के खेतों तक पहुंची। इससे मिट्टी के स्वास्थ्य, जल संरक्षण और आधुनिक तकनीकों की जानकारी किसानों को उनके घर पर ही उपलब्ध हुयी।
जून 2026 तक ‘पीएम-किसान’ योजना के तहत 23 किश्तों के माध्यम से 4.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इस पारदर्शी प्रणाली ने बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर सीधे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।
छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल खाद्यान्न तक सीमित न रहकर डेयरी, मत्स्य पालन, पशुपालन और बागवानी जैसे संबद्ध क्षेत्रों पर विशेष बल दिया गया। इसी कड़ी में ‘मीठी क्रांति’ के तहत बीते एक दशक में देश का शहद उत्पादन लगभग दोगुना हो चुका है। छोटे किसानों को बाजार की शक्ति देने के लिए ‘किसान उत्पादक संगठनों’ का गठन किया गया है। एफपीओ के माध्यम से छोटे किसान एकजुट होकर आधुनिक तकनीक, ऋण, प्रसंस्करण और बड़े बाजारों तक पहुंच का लाभ उठा रहे हैं।
दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए 11,440 करोड़ रुपये के विशेष मिशन की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही ‘श्री अन्न’ (मिलेट्स) को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देकर देश की पोषण सुरक्षा को मजबूत करने का काम किया जा रहा है।
ग्रामीण बुनियादी ढांचे के कायाकल्प के तहत ‘जल जीवन मिशन’ से ग्रामीण नल-जल कवरेज 17 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 99 प्रतिशत गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ा गया है और ‘पीएम आवास योजना-ग्रामीण’ के तहत 3 करोड़ से अधिक पक्के घर बनाए गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के तहत किसान अब केवल भोजन उत्पादक यानी ‘अन्नदाता’ नहीं रह गए हैं, बल्कि सौर ऊर्जा अपनाने और उत्पादित करने के साथ वे ‘ऊर्जादाता’ की भूमिका भी निभा रहे हैं, जिससे उनकी आय का एक नया और टिकाऊ जरिया बना है।
भारतीय कृषि का वर्तमान चरण अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उच्च मूल्य, अधिक पौष्टिक और जलवायु-अनुकूल खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है।

