मनरेगा में एक साल का अनुभव नहीं तो नियुक्ति अवैध : हाईकोर्ट

जबलपुर: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा में मेट के रूप में न्यूनतम एक वर्ष का वास्तविक कार्य अनुभव नहीं होने पर ग्राम रोजगार सहायक की नियुक्ति में 15 अतिरिक्त अंकों का लाभ नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सालिकराम लिल्हारे की अपील निरस्त करते हुए नियुक्ति को अवैध ठहराने वाले एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा है।

बालाघाट जिले की जनपद पंचायत किरनापुर की ग्राम पंचायत जनवा का है। सालिकराम करीब 15 वर्ष तक ग्राम रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत रहे। उनकी नियुक्ति को रामलाल नागेश्वर ने चुनौती दी थी। शिकायत में आरोप था कि सालिकराम ने संबंधित पंचायत में मनरेगा के तहत मेट के रूप में कार्य नहीं किया, फिर भी उन्हें अनुभव के आधार पर 15 अतिरिक्त अंक दिए गए।

जिला कलेक्टर ने 9 मई 2011 को नियुक्ति निरस्त कर दी थी। हालांकि, अतिरिक्त कमिश्नर ने उनके पक्ष में आदेश दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका हुई। एकलपीठ ने 18 अगस्त 2026 को अतिरिक्त कमिश्नर का आदेश निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने भी माना कि निर्धारित एक वर्ष का वास्तविक अनुभव पात्रता की अनिवार्य शर्त है। केवल लंबे समय तक नौकरी करने से नियुक्ति की मूल पात्रता की कमी दूर नहीं होती। राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता राजेश तिवारी ने पक्ष रखा

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