भारत-स्विट्जरलैंड के बीच प्रवासन, युवा पेशेवरों और परिवहन तकनीक समेत पांच समझौते

नयी दिल्ली 05 अक्टूबर (वार्ता) भारत और स्विट्जरलैंड ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रवासन एवं गतिशीलता, युवा पेशेवरों, परिवहन तकनीक, विज्ञान एवं अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्रों में पांच समझौते और व्यवस्थाएं तय की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत यात्रा पर आए स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच सोमवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये।

प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी पर समझौता ज्ञापन का उद्देश्य समान व्यवहार के सिद्धांतों के आधार पर प्रवासन और गतिशीलता में सहयोग विकसित करना तथा राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप अनियमित प्रवासन, मानव शोषण और तस्करी को रोकना एवं उनसे निपटना है। इसके तहत पांच वर्ष तक के मल्टीपल-एंट्री वीजा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा के दौरान छह महीने तक ठहरने की अनुमति होगी। छात्रों के लिए एक वर्ष के नवीकरणीय परमिट का भी प्रावधान किया गया है।

दोनों देशों के बीच युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान पर समझौता भी होगा। इसका उद्देश्य दूसरे देश में अस्थायी रोजगार पाने वाले युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान को विनियमित करना है, ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र में पेशेवर और भाषा संबंधी कौशल विकसित कर सकें। इसके तहत प्रत्येक देश से सालाना 300 लोगों का आवागमन होगा, जिसे बढ़ाकर 500 किया जा सकता है। राष्ट्रीयता और निवास की स्थिति के सत्यापन के लिए 30 या 90 दिनों की समयसीमा समेत अन्य प्रावधान भी इसमें शामिल हैं।

परिवहन तकनीक, गतिशीलता प्रणालियों और चिन्हित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने एवं सहयोग के लिए स्विट्जरलैंड के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स, एजुकेशन एंड रिसर्च और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी है। इसका उद्देश्य टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग बढ़ाना है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी, सुरंगों और अन्य परिवहन क्षेत्रों में तकनीक एवं बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने पर ध्यान रहेगा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच आशय पत्र भी प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य भारतीय और स्विस अनुसंधान समुदायों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देना, खोजपरक वैज्ञानिक सहयोग का समर्थन करना, भविष्य में संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारियां विकसित करना और आपसी सहमति वाले प्राथमिकता क्षेत्रों में दीर्घकालिक पहलों को बनाए रखने के लिए व्यापक ढांचा तैयार करना है।

इसके अलावा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता में सहयोग के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था होगी। इसके तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए इंडो-स्विस अकादमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग कार्यक्रम लागू किया जाएगा। इसमें द्विपक्षीय आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यशालाएं, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग शामिल होंगे। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से इंडो-स्विस रिसर्च फ्लैगशिप कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की भी घोषणा की गयी है।

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