ब्रिटेन की ग्रीन पार्टी ने जायोनिज्म की तुलना नस्लवाद से की, इजराइल ने पार्टी नेता जैक पोलांस्की की देश में एंट्री पर लगाई रोक

लंदन, ब्रिटेन की ग्रीन पार्टी ने अपने हालिया 2026 के कॉन्फ्रेंस में आधिकारिक रूप से एंटी-जायोनिस्ट रुख अपनाने के पक्ष में मतदान किया है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। ग्रीन पार्टी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जायोनिज्म को एक जातीय-राष्ट्रवादी राजनीतिक परियोजना के रूप में परिभाषित करने वाला यह प्रस्ताव 1,022 के मुकाबले 813 वोटों से पारित कर दिया गया। पार्टी के इस निर्णय में कहा गया है कि एंटी-जायोनिज्म को यहूदी-विरोध (एंटीसेमिटिज्म) के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। इसके साथ ही पार्टी ने फिलिस्तीनी मुक्ति, वापसी के अधिकार, बहिष्कार (BDS) और इजराइल के खिलाफ पूर्ण हथियार प्रतिबंध का समर्थन करने की भी बात दोहराई है।

अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट रिमेंबरेंस अलायंस की परिभाषा के तहत प्रस्ताव को बताया गया यहूदी-विरोधी, विदेश मंत्री ने उठाया कड़ा कदम

ग्रीन पार्टी के इस रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इजराइल के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट रिमेंबरेंस अलायंस (IHRA) की परिभाषा के तहत स्पष्ट रूप से एंटीसेमिटिक करार दिया है। इजराइल का कहना है कि यह प्रस्ताव यहूदी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को पूरी तरह नकारता है और ‘नदी से समुद्र तक’ फिलिस्तीनी राज्य की मांग के जरिए असल में इजराइल राज्य के अस्तित्व को मिटाने का प्रयास है। इस कड़े विरोध के बाद इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए ग्रीन पार्टी के नेता जैक पोलांस्की को इजराइल में प्रवेश करने से प्रतिबंधित करने का बड़ा फैसला लिया है।

मानवाधिकारों और समानता के नाम पर लिया गया फैसला, दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक दूरियां और गहरी होने के आसार

ग्रीन पार्टी के प्रवक्ताओं का तर्क है कि यह निर्णय सदस्यों के बीच हुई गहरी और गंभीर चर्चा के बाद बराबरी, न्याय, मानवाधिकारों और हर तरह के नस्लवाद के विरोध के तहत लिया गया है। पार्टी का यह भी कहना है कि वह फिलिस्तीनी और सीरियाई जमीनों पर गैर-कानूनी कब्जों का विरोध करती रही है और इजराइली सरकार को हथियारों की बिक्री रोकने की मांग करती आई है। हालांकि, इस नीतिगत बदलाव के बाद दोनों देशों और राजनीतिक समूहों के बीच कूटनीतिक दूरियां और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि इजरायली सरकार ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रविरोधी और यहूदी-विरोधी एजेंडे को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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