नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट आज यानी सोमवार को उस महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार अकेले उन संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं जो विधिवत रूप से पूरे बहु-सदस्यीय चुनाव पैनल के लिए तय की गई हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। वरिष्ठ वकील विकास सिंह द्वारा यह मामला सीजेआई के समक्ष उठाए जाने के बाद इसे आज के लिए सूचीबद्ध किया गया था। याचिका में मांग की गई है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को मिला दिशा-निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि सामूहिक निकाय का होना चाहिए।
दो चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई 14 आपत्तियों और फाइल नोटिंग्स का दिया गया है हवाला
याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला देते हुए सामूहिक निर्णय लेने के नियमों के पालन पर जोर दिया है। इस याचिका में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दर्ज की गई कम से कम 14 आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, जो कथित तौर पर सीईसी के नाम पर उनकी मंजूरी के बिना लिए गए फैसलों के संबंध में हैं। पिटीशन में बिना पोल बॉडी की मंजूरी के जारी किए गए संचार, उड़ानों की विदेशी यात्राओं, फॉर्म 6 में बदलाव, और इलेक्टोरल रोल डेटाबेस तक पहुंच जैसे गंभीर मुद्दों पर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
सामूहिक निर्णय लेने के ढांचे को सुनिश्चित करने और जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की है मांग
याचिका में अदालत से यह घोषित करने की मांग की गई है कि अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की शक्तियों का इस्तेमाल स्थापित संवैधानिक और सांविधिक ढांचे के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। साथ ही, विवादित फैसलों से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और चुनाव आयोग के आईटी ढांचे में किए गए बदलावों व मतदाता सूची डेटाबेस के केंद्रीयकरण को लेकर उठाई गई चिंताओं पर दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है। आज होने वाली इस सुनवाई पर राजनीतिक गलियारों और कानूनी जगत की पैनी नजरें टिकी हुई हैं।

