पीटीआई ने इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर लॉन्ग मार्च शुरू किया

पेशावर, (वार्ता) पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने रविवार को जेल में बंद पार्टी के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर अपना लॉन्ग मार्च शुरू किया।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी इस लॉन्ग मार्च का नेतृत्व करने के लिए आज हेलीकॉप्टर से लक्की मरवत पहुंचे।

पार्टी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में समर्थकों की भीड़ के बीच अफरीदी का काफिला आगे बढ़ता हुआ दिखाई दिया।

मार्च का पहला चरण आज दोपहर में गांधी चौक से शुरू हुआ, जिसमें लक्की मरवत, टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान और बन्नू के समर्थक जुलूस में शामिल हुए।

सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने “राजनीतिक मार्च के लिए सरकारी हेलीकॉप्टर” का इस्तेमाल करने पर अफरीदी की आलोचना की और इसे “इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन” बताया।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “प्रांत में आतंकवाद फैल रहा है और नीरो बांसुरी बजा रहा है।”

इससे पहले खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर के नेतृत्व में पीटीआई कार्यकर्ता मार्च के लिए डेरा इस्माइल खान से निकले और प्रतिभागियों से शांति बनाए रखने, अनुशासन का पालन करने और हिंसा, तोड़फोड़ तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ टकराव से बचने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “जो लोग सड़कें जाम करते हैं या टकराव में शामिल होते हैं, वे हमारे कार्यकर्ता नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि पार्टी “जीयो और जीने दो” की नीति का पालन करेगी।

पीटीआई समर्थक पेशावर-कराची सिंधु राजमार्ग पर गांधी चौक के पास भी जमा हुए जहां भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था, जिसमें पुलिस, बख्तरबंद वाहन और बम निरोधक दस्ते शामिल थे।

खैबर पख्तूनख्वा मुख्यमंत्री के गृह और जनजातीय मामलों के विशेष सहायक तारिक साद ने कहा कि बन्नू, डेरा इस्माइल खान, टैंक, उत्तर वजीरिस्तान और दक्षिण वजीरिस्तान के कार्यकर्ता मार्च में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग कर्फ्यू या अन्य सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण इसमें शामिल नहीं हो पा रहे हैं, वे बाद में पेशावर की ओर जाने वाले रास्ते पर जुलूस में शामिल हो सकते हैं।

यह मार्च पहले 27 सितंबर के लिए तय किया गया था, लेकिन इसे 04 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया गया।

अफरीदी के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, काफिला पहली रात करक के पास बिताएगा और फिर पांच अक्टूबर को कोहाट की ओर बढ़ेगा।

मार्च के पेशावर की ओर बढ़ने से पहले, छह अक्टूबर को कोहाट, हंगू, कुर्रम और ओरकजई से लोग इसमें शामिल होंगे। इसके बाद यह पेशावर और चारसद्दा से होते हुए आठ अक्टूबर को खैराबाद पहुंचेगा, जहां आंदोलन के अगले चरण की घोषणा होने की उम्मीद है।

संघीय सरकार ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में घुसने नहीं दिया जाएगा। वहीं, सरकारी अधिकारियों ने सुरक्षा चिंताओं और प्रस्तावित लामबंदी का हवाला देते हुए खैबर पख्तूनख्वा में राष्ट्रपति शासन या आपातकाल लगाने की संभावना भी जताई है।

मार्च से पहले प्रदेश के कई जिलों में धारा 144 के तहत प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं।

डेरा इस्माइल खान में 04 अक्टूबर से 06 अक्टूबर तक तय रास्तों पर लोगों और गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। कानून-व्यवस्था और जन-सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए दक्षिण वजीरिस्तान, टैंक और हंगू के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं।

इन प्रतिबंधों में कुछ खास गाड़ियों की आवाजाही पर रोक और कुछ इलाकों में तय रास्तों पर लोगों और गाड़ियों की आवाजाही पर सीमाएं शामिल हैं।

कानून लागू करने वाली एजेंसियों और आपातकालीन सेवाओं को इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है। जांगिड़

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