जयपुर, 03 अक्टूबर (वार्ता) राजस्थान उच्च न्यायालय ने उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड से जुड़े मामले में पांच आरोपियों को जमानत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिकायें खारिज कर दीं।
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने शनिवार को यह आदेश दिया। अदालत ने एनआईए मामलों की विशेष अदालत, जयपुर द्वारा वर्ष 2024 में जमानत देने से इन्कार करने के आदेशों को बरकरार रखा।
न्यायालय ने वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में उपलब्ध अभियोजन सामग्री के आधार पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर वैधानिक प्रतिबंध लागू होता है।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले की सुनवाई सक्रिय रूप से आगे बढ़ रही है। ऐसे में केवल लंबे समय से जेल में बंद होने के आधार पर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जमानत देने का आधार नहीं बनता। इस आधार पर अदालत ने आरोपियों को राहत देने से इन्कार कर दिया।
पीठ ने अपने आदेश में आतंकवाद, कानून के शासन और राज्य की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के प्रश्न पर विचार करते समय यूएपीए के विशेष प्रावधानों और मामले में उपलब्ध अभियोजन सामग्री को ध्यान में रखना आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि उदयपुर में 28 जून 2022 को दर्जी कन्हैया लाल की हत्या के मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने की थी। पांचों आरोपियों ने विशेष अदालत द्वारा जमानत नहीं दिए जाने के फैसलों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
