
भानपुरा। सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने तथा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन भानपुरा के सिविल अस्पताल से सामने आया एक मामला इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्राम पंचायत नावली निवासी गर्भवती महिला रेखा पति मुकेश को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन 2 अक्टूबर की रात सिविल अस्पताल भानपुरा लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में महिला को भर्ती करने के बजाय उसे वापस गांव ले जाने को कहा गया। इसके बाद परिजनों को महिला की डिलीवरी गांव में ही करवानी पड़ी।
परिजनों के अनुसार रेखा को रात में पेट में तेज दर्द और प्रसव पीड़ा हो रही थी। उसे अस्पताल लाने के बाद भी न तो भर्ती किया गया और न ही महिला के आवश्यक दस्तावेज अथवा सोनोग्राफी रिपोर्ट देखने की प्रक्रिया अपनाई गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया तथा कहा कि नावली की महिलाओं की डिलीवरी यहां नहीं कराई जाती। इसके बाद वे महिला को वापस गांव ले गए, जहां डिलीवरी कराई गई।
परिजन बोले- 181 पर की शिकायत
मामले को लेकर महिला के देवर जीतमल से फोन पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि रात में वे अपनी भाभी को प्रसव के लिए सिविल अस्पताल भानपुरा लेकर पहुंचे थे। वहां मौजूद स्टाफ ने कथित रूप से कहा कि नावली की डिलीवरी यहां नहीं कराई जाती, जहां जाना हो वहां जाएं। इसके बाद वे महिला को वापस गांव ले आए और गांव में ही डिलीवरी कराई। जीतमल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत दर्ज कराई है।
अस्पताल प्रभारी ने कहा- जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामले को लेकर सिविल अस्पताल भानपुरा के प्रभारी डॉ. अभिषेक से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में आया है। पूरे मामले की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी तथा जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
लक्ष्य टीम के सम्मान के बाद व्यवस्था पर सवाल
गौरतलब है कि सिविल अस्पताल भानपुरा को कुछ समय पूर्व दिल्ली से आई लक्ष्य टीम द्वारा प्रसव सेवाओं और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के लिए चिन्हित कर सम्मानित किया गया था। जिले के चुनिंदा अस्पतालों को इस तरह का सम्मान मिला था। ऐसे में प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को कथित रूप से अस्पताल में भर्ती नहीं किए जाने का मामला अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रसव सेवाओं की निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
परिजनों का कहना है कि कुछ माह पूर्व भी नावली गांव की एक महिला को प्रसव के लिए सिविल अस्पताल भानपुरा लाया गया था। आरोप है कि उस समय भी उसे भर्ती नहीं किया गया और बाद में घर पर ही प्रसव कराया गया। परिजनों के अनुसार उस मामले में महिला को अपने बच्चों को खोना पड़ा था। हालांकि, इस पुराने मामले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
योजनाओं और जमीनी हकीकत में अंतर पर सवाल
एक ओर सरकार गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव और संस्थागत प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाखों रुपए खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को अस्पताल पहुंचने के बाद भी भर्ती नहीं किया जाता है तो व्यवस्थाओं की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को समय पर उपचार और सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिले, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच कर व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
