नयी दिल्ली, (वार्ता) भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास की संवैधानिक और वैधानिक वैधता, कार्यप्रणाली तथा योग्य मतदाताओं पर इसके प्रभाव की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के पूर्व जजों का एक स्वतंत्र पांच-स्तरीय आयोग गठित किया गया है।
‘लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन’ (एलएएफसी) ने शुक्रवार को इस आयोग के गठन की घोषणा की।
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता में बना यह आयोग पूरी तरह स्वायत्त रूप से काम करेगा। आयोग में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए पटनायक, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बद्र दुर्रेज अहमद, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रेखा शर्मा और पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश शामिल हैं।
आयोग नागरिकों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से सीधे फीडबैक लेने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में जनसुनवाई आयोजित करेगा। इसके साथ ही, एक समर्पित शोध शाखा मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करेगी, जबकि एक कानूनी सहायता टीम नियमों व प्रक्रियाओं की समीक्षा कर यह जांचेगी कि एसआईआर प्रक्रिया में संवैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन हुआ है या नहीं।
कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, राजू रामचंद्रन, चंदर उदय सिंह और वृंदा ग्रोवर जैसे वरिष्ठ वकील इस जांच को रणनीतिक कानूनी सलाह प्रदान करेंगे।
एलएएफसी ने हालांकि स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष और सिफारिशें पूरी तरह से आयोग के न्यायिक सदस्यों की जिम्मेदारी होंगी और इस पर किसी बाहरी संस्था का प्रभाव नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि यह पहल एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और नागरिक समूहों के जताये जा रहे इस अंदेशे के बीच हुई है कि इससे योग्य मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग का दावा है कि इसका मकसद सिर्फ फर्जी प्रविष्टियों को हटाना है।
यह स्वतंत्र आयोग अपनी प्रक्रिया पूरी कर दिसंबर 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा।
