ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में विपक्षी दलों का प्रदर्शन, 600 लोग हिरासत में लिये गये

नयी दिल्ली 02 अक्टूबर (वार्ता) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में धांधली का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी और मुंबई में प्रदर्शन किया।

श्री कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी पार्टी के नेताओं और विभिन्न छात्र इकाइयों के सदस्य सड़कों पर उतरे और श्री कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। आम आदमी पार्टी (आप), युवा कांग्रेस, राष्ट्रीय भारतीय छात्र संघ (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसए) के कार्यकर्ताओं ने यहां अलग- अलग प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन की वजह से जंतर मंतर के आस पास 12 स्टेशनों को बंद कर दिया था। जंतर मंतर की ओर आने वाली सड़कों पर कई जगहों पर बैरिकेड लगाये गये थे, इस वजह से इस इलाके में सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुई।

इस दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान राजधानी के विभिन्न इलाकों से लगभग 600 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया। हिरासत में लिए गये लोगों में आप की नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, आप के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, संजीव झा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और कई दूसरे नेता शामिल थे।

हिरासत में लेने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि गांधी जयंती पर इस देश ने एक अनोखा और भयावह दिन देखा। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने वही किया जो अंग्रेज़ सरकार किया करती थी और इस देश की जनता ने वही किया जो हमारे स्वतंत्रता सेनानी किया करते थे। सरकार ने दमन किया पुलिसिया राज बनाया, बर्बरता की, बोलने की इजाज़त नहीं दी लेकिन दिल्ली और देश के कोने कोने से लोग आए। उन्होंने कहा कि श्री कुमार के ख़िलाफ़ संसद में महाभियोग नहीं चलाया गया तो इस देश की सड़कों पर महाभियोग चलाएगी। उन्होंने कहा कि आज जंतर मंतर से ‘मुख्य चुनाव अभियुक्त’ के ख़िलाफ़ महाभियोग कि शुरुआत हो चुकी है।

श्री भारद्वाज ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद उन्हें और श्री संजीव झा को हिरासत में लिया गया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आंदोलन जारी रखने तथा जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की।आप ने कहा कि देश से तानाशाही का अंत होना तय है और प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को जाना ही होगा।

आप के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य संजय सिंह वोट चोरी के खिलाफ शुक्रवार को संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गये। श्री सिंह जब संसद भवन में जा रहे थे, तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया, जिस पर उन्होंने ऐतराज जताया और कहा कि एक सांसद को संसद भवन में जाने से कैसे रोक सकते हैं। इसके बाद पुलिस ने उन्हें अंदर जाने की इजाजत दी और महात्मा गांधी की प्रतिमा पास धरने पर बैठ गये ।

श्री सिंह ने कहा , “जिस बापू ने अंग्रेजों के क्रूर शासन के खिलाफ पूरे देश की जनता को जगाने का काम किया था, आज उनकी जयंती पर मैं उनसे यही प्रार्थना कर रहा हूं कि वे देश की जनता को इन काले अंग्रेजों से लड़ने की ताकत दें। बापू देशवासियों को वोट चोरी और नरेंद्र मोदी, अमित शाह तथा ज्ञानेश कुमार की तानाशाही के खिलाफ मजबूती से खड़े होने की शक्ति प्रदान करें। सभी देशवासियों से अपील है कि अपनी-अपनी जगह पर आवाज बुलंद करें और वोट चोरी तथा भाजपा की तानाशाही के खिलाफ एकजुट होकर लड़ें।”

एसएफआई की छात्र नेता आइशी घोष ने कहा कि डीवाईएफआई और एसएफआई के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिरासत में लेकर आंदोलन को रोका नहीं जा सकता और यह आंदोलन की शुरुआत भर है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में संगठन ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने पांच, रायसीना रोड स्थित संगठन के मुख्यालय से जंतर-मंतर की ओर मार्च किया। मार्च में सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही और मतदाता सूचियों और चुनाव संचालन से जुड़े मुद्दों पर निर्वाचन आयोग से जवाब देने की मांग की।

जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग की। इसके बाद पुलिस ने श्री जाखड़ समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने से पहले श्री जाखड़ ने कहा कि छात्रों को हिरासत में लेकर लोकतंत्र की आवाज को नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब सार्वजनिक रूप से देने की मांग की।

युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन करते हुए उनसे पद छोड़कर तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।

युवा कांग्रेस के प्रवक्ता वरुण पांडेय ने बताया कि संगठन के कार्यकर्ताओं प्रतीकात्मक लेकिन अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने ‘भूत’ की कल्पना का रूप धारण कर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। श्री पांडे ने बताया कि इस दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ता युवा कांग्रेस कार्यालय से चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर जा रहे थे, तभी दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया।

उन्होंने बताया कि इस दौरान युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं का नेतृत्व करते हुए कार्यकर्ताओं से जोश खरोश के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त पर दबाव बनाने के लिए पूरे देश में प्रदर्शन करने का आह्वान किया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। श्री चिब ने कहा, “आज हमारे कार्यकर्ताओं ने भूत का रूप धारण कर देश को एक प्रतीकात्मक संदेश दिया है। सवाल यह है कि लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक को लेकर जनता के मन में इतने सवाल क्यों पैदा हो रहे हैं। अगर चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को सामने आकर इस्तीफा देना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग किसी सरकार या किसी राजनीतिक दल की निजी संस्था नहीं है, बल्कि देश के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की संस्था है। इसकी विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर उठने वाले हर सवाल का जवाब देना सीईसी की जिम्मेदारी है। चुप्पी, टालमटोल और जवाबदेही से बचने की राजनीति लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए सैकड़ों युवा और छात्र प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा की है। ये प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोकने की मांग कर रहे थे। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रशासन नागरिकों के संवैधानिक विरोध के अधिकार को दबा रहा है।

माकपा पोलित ब्यूरो द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति न मिलने और भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (डीवाईएफआई), ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) तथा अन्य युवा व छात्र संगठनों से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचे। पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने “पूरे शहर को छावनी में बदल दिया” और धरना स्थल तक पहुंचने का प्रयास कर रहे लोगों को जबरन हिरासत में ले लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें पुलिस बसों में ठूंस दिया गया, जिससे कई कार्यकर्ता घायल हो गए।

बयान में कहा गया कि प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव को तुरंत पद से हटाने की मांग कर रहे थे। माकपा ने आरोप लगाया कि श्री ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग को “भाजपा के चुनावी कामकाज के बैक ऑफिस” के रूप में बदलने में भूमिका निभाई है। यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर गहराते राजनीतिक विवाद के बीच हुआ है।

विपक्षी दल और नागरिक संगठन इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग का तर्क है कि इस अभ्यास का उद्देश्य दोहरी व अयोग्य प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता सूची को सटीक बनाना है।

माकपा के अनुसार, पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए नेताओं में पार्टी के महासचिव एम. ए. बेबी और वरिष्ठ नेता वृंदा करात शामिल हैं। इसके अलावा डीवाईएफआई के महासचिव हिमाग्नराज भट्टाचार्य, डीवाईएफआई अध्यक्ष व सांसद ए. ए. रहीम, एसएफआई के महासचिव सृजन भट्टाचार्य, एसएफआई अध्यक्ष आदर्श एम. शाजी और एसएफआई संयुक्त सचिव व पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष को भी हिरासत में लिया गया। पार्टी ने कहा कि डीवाईएफआई और एसएफआई कार्यकर्ताओं को हटाने में पुलिस को दो घंटे से अधिक का समय लगा, जो युवाओं के कड़े प्रतिरोध को दर्शाता है।

प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की आलोचना करते हुए माकपा ने कहा कि जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल है और वहां लोगों को एकत्र होने से रोकना उनके शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार का हनन है। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार के शासन में लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती की जा रही है और जंतर-मंतर पर विरोध की अनुमति न देना सरकार की असहमति के प्रति असहिष्णुता को दर्शाता है।

माकपा पोलित ब्यूरो ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत हटाने, एसआईआर प्रक्रिया को समाप्त करने और हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की मांग की है।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान अपने और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के कार्यकर्ताओं की सामूहिक हिरासत की निंदा की है।

एसएफआई अध्यक्ष आदर्श एम. शाजी और महासचिव सृजन भट्टाचार्य की ओर से जारी एक बयान में दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जुटे छात्रों और युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

एसएफआई के अनुसार हिरासत में लिए गये नेताओं में एसएफआई के अखिल भारतीय नेता आदर्श एम. शाजी, सृजन भट्टाचार्य, आइशी घोष और एस. शिल्पा तथा डीवाईएफआई के नेता हिमाघ्नराज भट्टाचार्य, ए.ए. रहीम और संजीव कुमार शामिल हैं। संगठन ने कहा कि वरिष्ठ माकपा नेताओं, जिनमें महासचिव एम.ए. बेबी और बृंदा करात शामिल हैं, को भी प्रदर्शन में हिस्सा लेने के दौरान हिरासत में लिया गया। एसएफआई का दावा है कि एक हजार से अधिक कार्यकर्ताओं को दिल्ली के विभिन्न थानों में ले जाया गया।

संगठन ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र और युवा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताओं के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे थे। एसएफआई ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से नागरिकों के मतदान के अधिकार तक पहुंच प्रभावित होने का खतरा है और इसका असर दलितों, आदिवासियों, महिलाओं तथा अन्य कमजोर वर्गों पर पड़ सकता है। संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर छात्र और युवा चुप नहीं रहेंगे।

एसएफआई केंद्रीय कार्यकारिणी समिति ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि जवाबदेही सुनिश्चित होने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने कहा कि छात्रों, युवाओं, श्रमिकों, किसानों, महिलाओं और हाशिए के समुदायों की लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रयास का विरोध किया जायेगा।

 

 

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