बालाघाट/नयी दिल्ली, 01 अक्टूबर (वार्ता) लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि बालाघाट जिले के जगला गांव में कुपोषण और अन्य बीमारियों से बच्चों की मौत तथा लोगों को सरकारी सहयोग नहीं मिलने की स्थिति को देखकर लगता है कि मध्य प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। श्री गांधी ने गुरुवार को जगला गांव में कुपोषण, खसरा और मलेरिया से जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा कि यहां लोगों की जमीन, वन अधिकार अधिनियम और मनरेगा से जुड़े मुद्दे हैं। कई परिवारों ने अपने बच्चे खो दिए लेकिन अभी तक आधे लोगों को मुआवजा नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा, “मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि वो अपनी जिम्मेदारी निभाएं। बालाघाट में लोगों को स्कूल और अस्पताल की सुविधा दी जाए तथा उन्हें उनका हक दिया जाए। भाजपा सरकार 24 घंटे विकास की बात करती है लेकिन जिम्मेदारी निभाने के वक्त गायब हो जाती है।”
श्री गांधी ने कहा कि अगर सरकार प्रदेश में दो योजनाएं चला रही हैं तो लोगों को दोनों का फायदा मिलना चाहिए लेकिन एक योजना का फायदा देकर दूसरी से उनका नाम काट दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बालाघाट की स्थिति देखकर उन्हें काफी दुख हुआ और उन्होंने परिवारों से कहा है कि सरकार में आने पर कांग्रेस उनकी मदद करेगी।
उन्होंने कहा, “हम इन्हें वनवासी नहीं, आदिवासी कहते हैं और ये हिंदुस्तान के पहले मालिक हैं। आदिवासियों को देश में जगह और सुविधाएं मिलनी चाहिए।”
श्री गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश में हर तरफ हालात खराब हैं और यह पूरी तरह से मध्य प्रदेश सरकार की नाकामी है। उनका कहना था कि बालाघाट में जिस तरह आदिवासी बच्चों की जान गई, वह मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार की नाकामी है। श्री गांधी ने कहा कि वह लोकसभा में इस घटना के साथ ही देश में आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय का मुद्दा उठाएंगे।
इससे पहले बालाघाट रवाना होने से पहले श्री गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था कि वह उन आदिवासी परिवारों से मिलने जा रहे हैं, जिन्होंने बीमारी और भाजपा सरकार की उपेक्षा के कारण अपने मासूम बच्चों को खोया है। उन्होंने कहा था कि इस दुख में वे परिवार अकेले नहीं हैं और वह उनके साथ हैं। श्री गांधी ने कहा था कि कुछ दिन पहले वह केन-बेतवा आंदोलन के आदिवासी लोगों से भी मिले थे। परियोजना के कारण उनके गांव डूब रहे हैं लेकिन सरकार से उन्हें न पुनर्वास मिला और न मुआवजा। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें प्रताड़ना, सरकारी दमन और हिंसा मिली है।
उन्होंने कहा था कि इंदौर में ‘छात्रों की गूँज’ के दौरान भी आदिवासी छात्रों ने स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, भोजन, परीक्षाओं और आरक्षण के अधिकार से जुड़ी समस्याएं उनके सामने रखी थीं।

