इंदौर: प्रदेश में करीब 56 लाख हितग्राही सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, फिर भी पात्र बुजुर्ग पेंशन से वंचित होने की शिकायत कर रहे हैं. सवाल यह है कि योजना होने के बावजूद जरूरतमंदों तक इसका लाभ क्यों नहीं पहुंच रहा?एक बार फिर मामला वार्ड क्रमांक 54 से सामने आया है. वार्ड के न्यू इंदिरा एकता नगर में निम्न आय वर्ग और मजदूर परिवार बड़ी संख्या में रहते हैं. यहां रहने वाले कुछ बुजुर्गों से चर्चा में सामने आया कि पात्र होने के बावजूद उन्हें वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. वहीं, कुछ नए पात्र आवेदकों को भी पेंशन स्वीकृत नहीं होने की बात सामने आई है.
इतना ही नहीं, लकवा पीड़ित बुजुर्ग को भी योजना से वंचित कर दिया. स्थानीय लोगों का कहना है कि पेंशन के लिए संबंधित स्तर पर जानकारी और प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उन्हें लाभ नहीं मिल पाया. मध्यप्रदेश शासन के सामाजिक न्याय विभाग के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के निराश्रित वृद्ध पात्र हैं और वर्तमान में 600 रुपए प्रतिमाह पेंशन का प्रावधान है. वहीं, शासन के आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न पेंशन योजनाओं के करीब 56 लाख हितग्राही हैं. 2025 में करीब 3.50 लाख हितग्राहियों की ई-केवायसी लंबित थी. सवाल यह है कि वार्ड 54 के पात्र बुजुर्ग पेंशन से वंचित क्यों हैं और उनके आवेदनों की जांच व निराकरण की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
इनका कहना है
सात वर्ष पहले पति का देहांत हुआ था, निगम वाले मुक्तिधाम का कागज मांग रहे हैं. बहुत चक्कर लगाए, नहीं मिल रहा. बुजुर्ग विधवा हूं, इनमें से एक भी पेंशन नहीं मिल रही.
– सीता बाई
तीन वर्ष पहले अचानक पेंशन बंद कर दी. दो-तीन बार चक्कर लगाए, लेकिन कुछ नहीं हुआ. 600 रुपए से हाथ खर्चा निकल जाता था, अब वह भी आसरा नहीं रहा.
– जानकी बाई
पहले पेंशन मिलती थी, बंद कर दी गई. जीभ और पैर में लकवा लगा है. कौन सहायता करे, मुझे भागदौड़ भी नहीं होती। पेंशन से थोड़ा खर्चा निकल जाता था.
– रतन लाल
मेरी आयु 66 वर्ष हो चुकी है. पेंशन योजना का फॉर्म भी भर दिया है. कई बार दफ्तर भी गई, हमेशा बाद में आने का कहकर खाली हाथ लौटा देते हैं.
– गुलाब बाई गहलोत
