जबलपुर: हाईकोर्ट ने आईटीआई प्रशिक्षण अधिकारी की भर्ती में क्राफ्ट इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग स्कीम (सीआईटीएस) को अनिवार्य योग्यता नहीं बनाए जाने के मामले में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) और कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि प्रशिक्षण अधिकारी जैसे पद के लिए सीआईटीएस को अनिवार्य क्यों नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता छतरपुर निवासी सिपाही लाल अहिरवार एवं अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार ने आईटीआई प्रशिक्षण अधिकारियों के लिए सीआईटीएस अनिवार्य करने के संबंध में राज्यों को पत्र भेजा था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और झारखंड में सीआईटीएस को अनिवार्य किया गया है, जबकि मध्यप्रदेश में प्रशिक्षण अधिकारी भर्ती के लिए यह अनिवार्य योग्यता नहीं है। याचिका में इसी आधार पर मौजूदा भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि सीआईटीएस को अनिवार्य किए बिना प्रशिक्षण अधिकारियों की भर्ती की जा रही है।
डीजीटी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक सीआईटीएस में प्रशिक्षकों को तकनीकी कौशल के साथ प्रशिक्षण देने की विधि का प्रशिक्षण दिया जाता है और एनसीवीटी ने आईटीआई के सभी प्रशिक्षकों के लिए सीआईटीएस प्रशिक्षण अनिवार्य किया है। उल्लेखनीय है कि मप्र में प्रशिक्षण अधिकारी के नियुक्ति आदेश में भी परिवीक्षा अवधि के दौरान डीजीटी के एनएसटीआई/आईओटी से एक वर्षीय सीआईटीएस कोर्स उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। हालांकि, इसके अभाव में वेतनवृद्धि और उच्च पद पर पदोन्नति का लाभ नहीं देने का प्रविधान है। अब हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य सवाल यही है कि जब नियुक्ति के बाद सीआईटीएस प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है, तो भर्ती के स्तर पर इसे अनिवार्य योग्यता क्यों नहीं बनाया गया।
