नई दिल्ली, भारतीय फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका सरकार ने भारत और 19 अन्य देशों से आयात होने वाली दुर्लभ बीमारियों के इलाज में काम आने वाली विशेष दवाओं पर किसी भी प्रकार का आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) न लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग (कॉमर्स डिपार्टमेंट) ने इस संबंध में फेडरल रजिस्टर में एक आधिकारिक सूची जारी कर दी है, जिसमें उन देशों और चुनिंदा फार्मा श्रेणियों के नाम शामिल किए गए हैं जो इस नए जीरो-ड्यूटी फ्रेमवर्क के दायरे में पूरी तरह योग्य हैं।
किन दवाओं को मिली है छूट और क्या है अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश के मायने?
जारी की गई नई गाइडलाइंस के मुताबिक, जिन प्रमुख चिकित्सा श्रेणियों को इस कर छूट का फायदा मिलेगा, उनमें दुर्लभ बीमारियों की दवाएं, फर्टिलिटी ट्रीटमेंट, एडवांस सेल और जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स और कुछ पशु चिकित्सा से जुड़ी दवाइयां शामिल हैं। इसके अलावा इन अत्याधुनिक उपचारों को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले बुनियादी कंपोनेंट्स भी शून्य प्रतिशत टैरिफ के दायरे में आएंगे। यह विनियामक बदलाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड अप्रैल के उस आदेश से जुड़ा है, जिसके तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए चुनिंदा पेटेंट दवाओं और बायोलॉजिक्स पर कड़े शुल्क प्रावधान किए गए थे, लेकिन अब जेनेरिक मेडिकल प्रोडक्ट्स और इन विशेष जीवन रक्षक दवाओं को इससे पूरी छूट दे दी गई है।
भारत के अलावा इन देशों को भी मिलेगा फायदा, वैश्विक दवा बाजार में मजबूत होगी भारत की स्थिति
अमेरिका के इस जीरो-ड्यूटी फ्रेमवर्क का लाभ उठाने वाले देशों की सूची में भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश भी शामिल हैं। वाणिज्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन देशों के साथ वॉशिंगटन का ट्रेड और सिक्योरिटी फ्रेमवर्क एग्रीमेंट सक्रिय है, उन्हें इस नीति का सीधा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस फैसले से वैश्विक मंच पर भारतीय फार्मा एक्सपोर्ट को एक नई गति मिलेगी और अमेरिकी बाजार में भारतीय दुर्लभ और जेनेरिक दवाओं की पहुंच और अधिक सुगम हो जाएगी।

