नई दिल्ली, देश में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक तीखी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सीईसी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें चेतावनी दी है कि वे तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे दें, क्योंकि इसी में उनकी सुरक्षा और भविष्य सुरक्षित है। पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि यदि वह ‘अप्रूवर’ बन जाते हैं तो शायद बच जाएंगे, अन्यथा उनका आने वाला समय जेल की सलाखों के पीछे ही बीतेगा। कांग्रेस समेत पूरे ‘इंडिया’ गठबंधन ने चुनाव आयोग के फैसलों और कामकाज के तरीकों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े किए हैं।
फॉर्म-6 में छेड़छाड़ और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप, सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई की तैयारी
पवन खेड़ा के अलावा महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा, सांसद सुखदेव भगत और समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने भी चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा है। नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने नियमों को ताक पर रखकर फॉर्म-6 के साथ मनमाने तरीके से छेड़छाड़ की है और सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। विपक्ष का दावा है कि आयोग के अपने आंतरिक सदस्यों ने भी पिछले कुछ महीनों में पत्र लिखकर कार्यशैली पर आपत्ति जताई थी। अब विपक्षी दल इस पूरे मामले को लेकर केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ने के साथ-साथ सड़कों पर उतरकर बड़ा जन आंदोलन खड़ा करने की तैयारी कर रहे हैं।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गहराया टकराव, चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर उठ रहे हैं राष्ट्रीय सवाल
चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान को लेकर उपजा यह ताजा विवाद देश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ लेता दिख रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के फैसलों से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरा आघात पहुंच रहा है। दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियानों के बीच आयोग और विपक्षी दलों के बीच का यह टकराव आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में सरगर्मी बनी रहेगी।

