लखनऊ, 26 सितंबर (वार्ता) समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। लंबे समय से हृदय और किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे चौधरी का करीब दो सप्ताह से एसजीपीजीआई में उपचार चल रहा था।
श्री चौधरी को करीब दो सप्ताह पहले एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था। इससे पहले लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनकी हृदय संबंधी सर्जरी हुई थी। वह मैक्स अस्पताल में भी लंबे समय तक उपचाराधीन रहे और उनका डायलिसिस भी किया गया था।
राम गोविंद चौधरी आठ बार विधायक रहे। उन्होंने मार्च 2017 से मार्च 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वह मुलायम सिंह यादव सरकार में दो अलग-अलग कार्यकाल में मंत्री रहे। वर्ष 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में भी उन्होंने मंत्री पद संभाला।
उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत विभिन्न नेताओं ने शोक जताया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चौधरी के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष बताया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि उनके निधन से प्रदेश ने एक अनुभवी राजनेता और समर्पित जनप्रतिनिधि खो दिया है।
गौरतलब है कि राम गोविंद चौधरी का जन्म नौ जुलाई 1953 को बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक गांव में हुआ था। तीन भाइयों में सबसे बड़े चौधरी ने प्रारंभिक शिक्षा गांव और सिकंदरपुर में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज में बीएससी में प्रवेश लिया। छात्र समस्याओं को लेकर आंदोलनों में सक्रिय रहने के कारण उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था।
इसके बाद उन्होंने श्री मुरली मनोहर टाउन पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में दाखिला लिया और छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए। वर्ष 1972 में वह टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री और 1974 में अध्यक्ष चुने गए। आपातकाल के दौरान चौधरी लोकतांत्रिक अधिकारों के आंदोलन से जुड़े और जिले की छात्र युवा वाहिनी के सह-संयोजक बने। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर बलिया और बाराबंकी की जेलों में रखा गया।
उन्होंने संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ काम किया और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के करीबी सहयोगियों में शामिल रहे। समाजवादी आंदोलन से दशकों तक जुड़े रहे चौधरी अपने राजनीतिक जीवन में कमजोर और वंचित वर्गों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे।
